पाक में बाढ़ शुल्क लागू करने का फ़ैसला

पाक बाढ़
Image caption सब से ज़्यादा नुक़सान सिंध प्रांत को हुआ जहाँ भी अभी बाढ़ का पानी मौजूद है.

पाकिस्तान सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए देश में 'बाढ़ शुल्क' लागू करने का फ़ैसला किया है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में गुरुवार को केंद्रीय मंत्रीमंडल की एक बैठक हुई जिसमें बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए नया शुल्क लागू करने का फ़ैसला किया गया.

बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री हफ़ीज़ शैख़ और सूचना एवं प्रसारण मंत्री क़मर जमान कायरा ने एक पत्रकार वार्ता में इस की जानकारी दी और कहा कि इस शुल्क के ज़रिए बाढ़ पीड़ितों के लिए 70 करोड़ डॉलर जुटाने की कोशिश की जाएगी.

सरकार ने यह फ़ैसला अतंरराष्ट्रीय साहयता एजेंसियों और विभिन्न देशों के भारी दबाव के बाद लिया गया है जिस में कहा गया था कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता केलिए पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद माँगने से पहले अपने देश के धनी लोगों से शुल्क वसूल करे.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री क़मर ज़मान कायरा ने पत्रकारों को बताया, “मंत्रीमंडल ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए शुल्क लागू करने और जनरल सेल्ज़ टैक्स में सुधार करने का निर्णय लिया है.”

उन्होंने आगे बताया कि जनरल सेल्ज़ टैक्स में सुधार और बाढ़ शुल्क का मसौदा तुरंत संसद में पेश किया जाएगा.

सूचना मंत्री ने कहा, “बाढ़ शुल्क, निर्यात और राज्य कर बढ़ाने से सरकार को 42 अरब रुपए की आमदनी होगी.”

Image caption पाकिस्तान में करीब दो करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.

पाकिस्तान की 17 करोड़ की जनसंख्या में से केवल दो प्रतिशत सरकार को टैक्स देते हैं जिन में से अधिकतर वेतनभोगी हैं.

शुल्क का विरोध

पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट यानी एमक्यूएम ने 'फ़्लड टैक्स' लागू करने की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि इस से मध्यम वर्ग के लोगों को नुक़सान पहुँचेगा जो पहले ही टैक्स देते हैं.

मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट ने इस मुद्दे पर गुरुवार को संसद के सत्र का भी बाहिष्कार किया.

ग़ौरतलब है कि अगस्त के पहले सप्ताह में आई भयंकर बाढ़ से पाकिस्तान में दो करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए थे.

बाढ़ग्रस्त इलाक़ों का पूनर्निर्माण सरकार केलिए सब से बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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