'ईश-निंदा क़ानून ख़त्म करने की माँग'

आसिया बीबी
Image caption कुछ दिन पहले आसिया बीबी को इश-निंदा के आरोप में मौत की सज़ा मिली है.

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था 'ह्यूमन राईटस वॉच' ने पाकिस्तान सरकार से ईश-निंदा क़ानून और अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ इस्तेमाल हो रहे अन्य नियमों को ख़त्म करने की माँग की है.

'ह्यूमन राईटस वॉच' की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पाकिस्तानी सरकार ईश्वर की निंदा करने संबंधी क़ानून को ख़त्म करने के लिए संविधान में संशोधन करे और उन चरमपंथी गुटों के ख़िलाफ कड़ी कार्रवाई करे जो इस क़ानून की आड़ में अल्पसंख्यकों पर हिंसा करते हैं.

पंजाब प्रांत के ज़िले ननकाना साहब की स्थानीय अदालत ने कुछ दिन पहले ईश्वर की निंदा करने के आरोप में एक ईसाई महिला आसिया बीबी को मौत की सज़ा सुनाई थी.

ईश्वर की निंदा करने के आरोप में किसी महिला को सज़ा सुनाने की यह पहली घटना है जिसका मानवाधिकार के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने कड़ा विरोध किया है.

आसिया निर्दोष

'ह्यूमन राईटस वॉच' के वरिष्ठ शोधकर्ता अली दयान हसन ने कहा कि आसिया इस समय कई प्रकार की दिक्कतों का सामना कर रही है और उन्हें क़ैद में नहीं रखा जा सकता क्योंकि वह निर्दोष हैं.

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय हो रहा है और आसिया को मौत की सज़ा इस का स्पष्ट उदाहरण है.”

अली हसन ने बताया, “इस क़ानून को लेकर अल्पसंख्यकों में डर बना रहता है और यह उस वक़्त ख़त्म हो सकता जब इस क़ानून को ख़त्म किय जाए.”

Image caption पाकिस्तान के कई शहरों में आसिया बीबी के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार विशेषकर पंजाब की प्रांतीय सरकार अल्पसंख्यकों को मिल रही धमकियों का नोटिस ले और उन की सुरक्षा के उपाय करे.

'ह्यूमन राईटस वॉच' ने पंजाब सरकार से कहा है कि वह ईसाइयों, अहमदियों और दूसरे अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसक घटनाओं की निष्पक्ष जाँच करे और अभियुक्तों को न्याय के कटघरे तक पहुँचाए.

संस्था ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वह संविधान की धारा 295 और 298 को ख़त्म करने के लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव डाले.

क़ानून में संशोधन

इससे पहले पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शहबाज़ भट्टी ने कहा था कि सरकार ईश-निंदा क़ानून में संशोधन करने जा रही है और इस सिलसिले में वो धार्मिक संस्थाओं और विपक्षी दलों से राय-मशविरा कर रहे हैं.

ईश-निंदा कानून के तहत क़ुरान,पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद और इस्लाम से संबंधित कुछ पवित्र शख़्सियतों के बारे में निंदनीय बात कहने से मौत की सज़ा हो सकती है.

पाकिस्तान में एक वर्ग का मानना है कि कई मामलों में इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल भी किया जाता है.

सरकार अब इस तरह के मामलों पर रोक लगाना चाहती है.

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