बलूचिस्तान में मारे जा रहे हैं शिक्षक

Image caption ह्यूमन राइट्स वाच के आंकड़े चौंकानेवाले हैं.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वाच के मुताबिक पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम के प्रांत बलूचिस्तान में चरमपंथी शिक्षकों को सिलसिलेवार तरीके से निशाना बना रहे हैं.

ह्यूमन राइट्स वाच की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रांत में जनवरी 2008 और अक्टूबर 2010 के बीच कम से कम 22 शिक्षकों को मार डाला गया है.

इस रिपोर्ट में शिक्षकों पर किए गए कई हमलों का ज़िक्र भी है.

बलूचिस्तान में खनिज पदार्थों का अपार भंडार होने के बावजूद वह पाकिस्तान का एक सबसे पिछड़ा और ग़रीब प्रांत माना जाता है.

इस प्रांत में देश के धार्मिक कट्टरवादी रहते हैं और यहाँ स्थानीय कबायली नेताओं का अलगाववाद अपने चरम पर है.

सोमवार को जो रिपोर्ट छपी है, उसके मुताबिक ये दोनों गुट ही शिक्षकों पर हमले करने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

दक्षिण एशिया में इस संस्था के वरिष्ठ सहयोगी अली दयान हसन ने बीबीसी को बताया, ''अगर इस तरह की हत्या और धमकियाँ नहीं रुकीं तो भविष्य अंधकारमय है, न केवल बच्चों के लिए बल्कि विकास, अमीरी और प्रगति के लिए भी जो यहाँ कभी नहीं आ पाएँगे.''

आम नागरिक निशाने पर

ह्यूमन राइट्स वाच मानवाधिकारों के लिए काम करनेवाली पहली अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसने इस विषय पर काम किया है कि किस तरह से आम नागरिकों को बलूचिस्तान में लगातार निशाना बनाया जा रहा है.

जो लोग इस तरह की घटना के शिकार हुए हैं, उनके रिश्तेदारों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है.

जैसे-जैसे ये हमले बढ़ रहे हैं, वैसे वैसे सैकड़ों शिक्षकों ने प्रांत से बाहर स्थानांतरित किए जाने की माँग की है.

जिन लोगों को निशाना बनाया गया है, उसमें से ज़्यादातर पंजाब प्रांत के हैं.

इनको बदले की भावना से हमले के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि पाकिस्तान की सेना में इस प्रांत के लोग ज़्यादा हैं और हमला करनेवाले लोग सेना को ज़्यादतियों के लिए ज़िम्मेदार मानते हैं.

Image caption बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा ज़ोरों पर है.

शिक्षकों की हत्या के मामलों में तालेबान के क़रीबी माने जानेवाले स्थानीय सुन्नी चरमपंथी गुट भी हैं.

इन्होंने प्रांत की राजधानी क्वेटा में शिया मुसलमानों को निशाना बनाया है.

बलूचिस्तान में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद अबतक पाकिस्तान की सरकार इस तरह की हिंसा पर क़ाबू कर पाने में असमर्थ रही है.

बलूचिस्तान के एकेडेमिक स्टाफ़ एसोसिएशन के अध्यक्ष कलीमुल्ला बड़ेच कहते हैं कि बलूचिस्तान विश्वविद्यालय में अबतक तीन प्रोफेसरों को ख़ास निशाना बना कर मारा गया है.

इसके अलावा कॉलेजों और स्कूलों के दर्जनों अध्यापक भी मारे जा चुके है.

उनके मुताबिक इन हादसों का विश्वविद्यालय पर और अन्य शिक्षा संस्थानों पर बुरा असर पड़ा है. मारे जाने के ख़ौफ के चलते 80 पीएचडी प्रोफेसरों में से 35, बलूचिस्तान से तबादला लेने पर मजबूर हो चुके हैं.

इस सिलसिले में जब बीबीसी संवाददाता ने बलूचिस्तान की सरकार में प्रांतीय गृह सचिव अकबर दुर्रानी से बात की, तो उन्होंने इस रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा कि पिछले 2 सालों में दस से भी कम अध्यापकों को ख़ास तौर पर निशाना बनाकर मारा गया है और बलूचिस्तान में अब हालात बेहतर है.

उनका कहना था कि अध्यापकों के दूसरे सूबों में तबादले की घटनाओं में भी कमी आई है.

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