सरकार के समर्थक दल ने समर्थन वापस लिया

Image caption इस्लामी पार्टी का सरकार से समर्थन वापस लेने से फ़िलहाल सरकार पर कोई असर तुरंत नहीं पड़ेगा

पाकिस्तान की इस्लामी पार्टी जामियात-ए-उलेमा-ए-इस्लाम(जेयूआई)का कहना है कि वो सत्ताधारी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी(पीपीपी) से समर्थन वापस ले रही है.

जेयूआई का कहना है कि वह यह कदम उसकी पार्टी के एक नेता की मंत्रिमंडल से बर्ख़ास्तगी के बाद उठा रही है.

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री मोहम्मद आज़म खा़न स्वाति को प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी ने बर्ख़ारस्त कर दिया है.

इसके अलावा धार्मिक मामलों के मंत्री हामिद सईद काज़मी को भी हटा दिया गया है. काज़मी पीपीपी से हैं.

स्वाति पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप है.

इस मामले पर जनता में उनकी काफ़ी आलोचना भी हो चुकी है, लेकिन वह इन सभी आरोपों से इंकार करते हैं.

भ्रष्टाचार

Image caption मौलाना फ़ज़लुर रहमान जेयूआई के नेता हैं.

बीबीसी संवावदाता का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी से जेयूआई के अलग होने से सरकार कमज़ोर होगी.लेकिन इससे सरकार बहुमत नहीं खोएगी. संवावदाता का कहना है कि जेयूआई के समर्थन वापस लेने से सरकार नहीं गिरेगी क्योंकि वो एक छोटी पार्टी है.लेकिन इस ताज़ा घटनाक्रम से पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिरता पर ज़रुर सवाल खड़े हो गए हैं.

पाकिस्तान की 342 सदस्यीय राष्ट्रीय एसेंबली में इस पार्टी की सात सीटें है और 100 सीटों वाली सीनेट में 22 सदस्य हैं..

स्वाति की बर्ख़ास्तगी पर जेयूआई के नेता फ़ज़लुर रहमान का कहना था ,"हमारे लिए गठबंधन में शामिल रहना नामुमकिन है. हम सरकार को अलविदा कह रहे हैं."

बताया जाता है कि मोहम्मद आज़म खा़न स्वाति और हामिद सईद काज़मी दोनों के बीच काफ़ी कहासुनी हुई जिसके बाद दोनों को ही हटा दिया गया.

ये कहासुनी मक्का में पाकिस्तानी हज यात्रियों के लिए आवास सुविधाओं को लेकर कथित तौर पर हुए भ्रष्ट्राचार के कारण हुई थी.

इस घोटाले में धार्मिक मामलों के मंत्रालय का नाम लिया जा रहा है.

दरअसल क़ाज़मी के मंत्रालय ने 80 हज़ार हज यात्रियों के लिए आवास का इंतज़ाम किया था.

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