क्रिसमस पर विरोध करने का फ़ैसला

  • 21 दिसंबर 2010
आसिया बीबी
Image caption मौत की सज़ा का सामना कर रही ईसाई महिला आसिया बीबी का परिवार

पाकिस्तान के ईसाई समुदाय ने इस साल अपने धार्मिक त्यौहार क्रिसमस पर विरोध प्रदर्शन करने का फ़ैसला लिया है.

ईसाई समुदाय ने अदालत की ओर से एक ईसाई महिला आसिया बीबी को ईश्वर की निंदा के क़ानून के तहत सज़ा सुनाए जाने के बाद ऐसा फैसला लिया है.

ऑल पाकिस्तान क्रिस्चियन एसोसिएशन के जोज़फ़ फ्रांसेस ने बीबीसी को बताया कि 25 दिसंबर यानी क्रिसमस के दिन लाहौर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और पूरे देश में ईसाई समुदाय अपने घरों और चर्चों पर काले झंडे लगाएगा.

उन्होंने कहा कि इस साल क्रिसमस भी सादगी से मनाई जाएगी.

आसिया निर्दोष

जोज़फ़ फ्रांसेस ने अनुसार आसिया बीबी निर्दोष हैं और उन्हें दी गई सज़ा ठीक नहीं है और उनके ख़िलाफ दर्ज किए गए मुक़दमे की जाँच में कई ख़ामियाँ हैं.

उन्होंने बताया कि उन के समुदाय को आशंका है कि जेल के भीतर ही आसिया बीबी की हत्या कर दी जाएगी.

उन्होंने कहा, “इस साल क्रिसमस सादगी के साथ मानाने का उद्देश्य यही है कि ईश-निंदा क़ानून और इस फ़ैसले के ख़िलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सके और ईसाई समुदाय को एक मंच पर इकट्ठा किया जा सके.”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कुछ धार्मिक गुटों ने आसिया बीबी को मौत की सज़ा के फ़ैसले पर अमल करने के लिए एक पोस्टर प्रकाशित किया है जिस की वो निंदा करते हैं.

क़ानून ख़त्म करने की मांग

जोज़फ़ का कहना था कि संविधान की धाराएँ 295 ए और 295 बी को तुरंत ख़त्म किया जाए क्योंकि इन धाराओं के तहत जो भी मुक़दमे दर्ज किए जाते हैं वो बेबुनियाद होते हैं.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में कई लोगों को इश-निंदा क़ानून के तहत सज़ा सुनाई जा चुकी है और आसिया बीबी पहली महिला हैं जिन्हें यह सज़ा मिली है.

Image caption ईसाई समुदाय ने इश-निंदा क़ानून के ख़िलाफ़ कई बार विरोध प्रदर्शन किए हैं.

पंजाब प्रांत के ज़िले ननकाना साहब की स्थानीय अदालत ने कुछ दिन पहले ईश्वर की निंदा करने के आरोप में एक ईसाई महिला आसिया बीबी को मौत की सज़ा सुनाई थी.

ईश-निंदा कानून के तहत क़ुरान,पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद और इस्लाम से संबंधित कुछ पवित्र शख़्सियतों के बारे में निंदनीय बात कहने से मौत की सज़ा हो सकती है.

पाकिस्तान में एक वर्ग का मानना है कि कई मामलों में इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल भी किया जाता है.

सरकार अब इस तरह के मामलों पर रोक लगाना चाहती है.

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