भारत-रुस समझौते से पाक चिंतित

मेदवेदेव
Image caption रुसी राष्ट्रपति और मनमोहन सिंह ने 11 समझोतों पर हस्ताक्षर किए.

पाकिस्तान के भारत और रुस के बीच हुए परमाणु और सैनिक समझौतों पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि यह समझौते क्षेत्र के लिए ख़तरनाक हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने इस्लामाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “भारत और रुस के बीच परमाणु और सैनिक समझौतों से इस क्षेत्र में अस्थिरता होगी और इससे शक्ति संतुलन प्रभावित होगा.”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को इस प्रकार के समझौतों से चिंता है और अतंरराष्ट्रीय समुदाय इसका नोटिस ले.

ग़ौरतलब है कि रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव की भारतीय यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. इसमें असैनिक परमाणु सहयोग पर अहम समझौता शामिल हैं.

दिमित्री मेदवेदेव दो दिन की भारतीय यात्रा पर आए हैं. उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन से मुलाक़ात की और बाद संयुक्त पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार होता है तो भारत स्थाई सदस्य बनने का हक़दार है.

संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता के रुसी समर्थन पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने कहा, “पाकिस्तान हमेशा से संयुक्त राष्ट्र में सुधार लाने का इच्छुक रहा है और भारत की ओर से सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता की कोशिशों से संयुक्त राष्ट्र की सुधार प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.”

उन्होंने आगे कहा, “हम समझते हैं कि जो देश संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं और उन की यह कोशिशें संयुक्त राष्ट्र की सुधार प्रक्रिया में बड़ी रुकावट बन रही हैं.”

'सुरक्षा परिषद निष्पक्ष हो'

उन के अनुसार कई ऐसे देश हैं जो पाकिस्तान के इस पक्ष का समर्थन करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद को लोकतांत्रिक तरीक़े से चलना चाहिए और यह निष्पक्ष होनी चाहिए.

अब्दुल बासित ने कहा कि पाकिस्तान अपने पक्ष का पूरा बचाव करेगा और इस की कोशिश यही रहेगी कि इस हवाले से जो भी बातचीत हो वहा सार्थक हो और वह बातचीत प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद को ओर मज़बूत करे.

ग़ौतलब है कि इस से जब अमरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत की यात्रा की थी और उस समय उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के लिए भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया था.

पाकिस्तान ने अमरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के इस समर्थन पर कड़ी आलोचना की थी.

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