विपदाओं का वर्ष रहा 2010

पाक धमाका
Image caption पाकिस्तान में 2010 में करीब 24 आत्मघाती हमले हुए

पाकिस्तान के लिए वर्ष 2010 चरमपंथी हमलों, बम धमाकों और प्रकृतिक विपदाओं का साल सिद्ध हुआ.

इसी साल करीब 23 चरमपंथी हमले हुए जिस में 900 से अधिक लोग मारे गए और 1500 के करीब घायल हुए.

इसी साल पाकिस्तान ने भयंकर प्रकृतिक विपदाओं का सामना भी किया. ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के ज़िले कोहिस्तान में 17 फ़रवरी को आए ज़बरदस्त हिमस्खलन ने करीब 100 लोगों की जान ली जबकि अगस्त के पहले सप्ताह में भारी वर्षा और बाढ़ के कारण करीब 1600 लोग मारे गए और दो करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए.

पाकिस्तान के राजनीतिक प्रतिष्ठानों में भी गहमागहमी रही. विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों के भारी दबाव के बाद संसद ने संविधान के 18वे संशोधन को पारित कर राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के अधिकारों को घटा कर प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को सौंप दिया.

इस दौरान न्यायपालिका और सरकार के बीच में टकराव की स्थिति बन रही क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी ने भ्रष्टाचार के मुक़दमे फिर से चलाने के आदेश दिए. राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और उन के कई मंत्रियों के ख़िलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और इस संबंध में गृहमंत्री रहमान मलिक और क़ानून मंत्री बाबर आवाण ख़ुद अदालत के समक्ष पेश भी हुए.

चरमपंथी हमले

वर्ष 2010 के सूर्य का उदय एक आत्मघाती हमले से हुआ और हमलावर ने ख़ैबर पख़्तूख़्वाह प्रांत के कोहाट शहर में स्थित खेल के मैदान में अपने आप को उस समय बम से उड़ा दिया जब सुरक्षाकर्मी वॉलीबॉल खेल रहे थे. इस हमले में 95 से अधिक लोग मारे गए और कई अन्य घायल भी हुए.

सब से ज़्यादा आत्मघाती हमले और बम धमाके क़बायली इलाक़ों और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में हुए लेकिन देश के दूसरे प्रांत में इन कार्रवाईयों से बच नहीं सके.

28 मई को कुछ हमलावरों ने लाहौर में अहमदी समुदाय की दो मस्जिदों पर धावा बोल दिया और हमला कर करीब 86 लोगों को मार दिया. हमलावरों ने पहले गोलीबारी की, हथगोली फेंके और बाद में मस्जिदों के भीतर अपने आप को बम से उड़ा दिया. इन हमलों के ज़िम्मेदारी तालिबान विद्रोहियों ने स्वीकार की.

Image caption जुलाई में प्रसिद्ध सूफ़ी दरगाह दाता दरबार को निशाना बनाया गया

उस के करीब एक महीने बाद दो आत्मघाती हमलावरों ने लाहौर में प्रसिद्ध सूफ़ी स्थल दाता दरबार में अपने आप को बम से उड़ा दिया और करीब 50 लोगों को मौत की नींद सुला दिया. पाकिस्तान में पहली बार किसी सूफ़ी बुज़र्ग की मज़ार को निशाना बनाया गया.

सितंबर में शिया समुदाय के धार्मिक जुलूस पर लाहौर और क्वेटा में बम धमाका किया गया जिस में करीब 85 लोग मारे गए. इन हमलों की भी ज़िम्मेदारी तालिबान ने स्वीकार की. इन हमलों के कुछ दिनों के बाद हमलावारों ने कराची में एक सूफ़ी दरगाह को निशाना बनाया और आत्मघाती हमले में 10 लोगों की मौत हो गई. चरमपंथियों ने पंजाब के शहर पाकपतन में एक ओर प्रसिद्ध सूफ़ी बाबा फ़रीद की दरगाह पर भी हमला किया.

साल के आख़री तीन महीनों ने क़बायली इलाक़ों में कई अमरिकी मानवरहित विमानों के हमले देखे जिस में वरिष्ठ तालिबान नेताओं और विदेशी नागरिकों सहित कई लोग मारे गए. इन हमलों के ख़िलाफ पहली बार देशव्यापी विरोध प्रदर्शन भी हुए.

कराची में भी इसी साल स्थिति तनावपूर्ण रही और शहर में 100 से अधिक कथित हत्याएं हुई. पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली प्रांतीय गठबंधन सरकार में शामिल दो गुट मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट और आवामी नेशनल पार्टी ने एक दूसरे पर इन हत्याओं के आरोप लगाए. बलूचिस्तान प्रांत में हुई हिंसक घटनाओं में कई लोग मारे गए और प्रांत में 65 से अधिक शव मिले जिन बारे में कहा गया कि यह उन बलोच नेताओं के हैं जिन को पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों ने अपहरण किया था. बलूचिस्तान में पिछले कई सालों ने बलोच समुदाय अपने अधिकारियों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

इस साल पाकिस्तान में तीन विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए. 28 जुलाई को कराची से इस्लामाबाद आ रहा एयर ब्लू का यात्री विमान इस्लामाबाद से सटे पहाड़ों से टकरा गया जिस में 152 लोग मारे गए. कराची हवाई अड्डे के पास दो छोटे विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए जिस में करीब 33 लोग मारे गए.

भारी वर्षा और बाढ़

भीषण वर्षा के कारण आई बाढ़ से करीब 1600 लोग मारे गए और दो करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए. यह पाकिस्तान के इतिहास की सबसे भीषण बाढ़ थी जिस ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह, पंजाब और सिंध प्रांत को बुरी तरह प्रभावित किया.

Image caption पाकिस्तान ने इसी साल ऐतिहास के भयंकर बाढ़ का सामना किया

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून और जानी-मानी अभिनेत्री एंजेलीना जोली सहित कई अतंरराष्ट्रीय नेताओं ने बाढ़ ग्रस्त इलाक़ों का दौरा किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से साहयता की अपील की.

संयुक्त राष्ट्र ने इस विपदा को सूनामी से बढ़ कर बताया और पीड़ितों की साहयता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दो अरब डॉलर से ज़्यादा की मदद की अपील जारी की.

इस बाढ़ से पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र में भारी नुक़सान का सामना करना पड़ा और देश का ‘फ़ूड बास्केट’ कहे जाने वाले इलाक़े में खड़ी फ़सलें नष्ट हो गई.

बाढ़ के इलावा ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के ज़िले कोहिस्तान में हिमस्खलन से 100 से अधिक लोग मारे गए.

पाक-भारत संबंध

नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान बातचीत करने पर राज़ी हुए और पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर दिल्ली गए जहाँ उन्होंने भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव से मुलाक़ात की.

उस के बाद भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव इस्लामाबाद पहुँचीं और दोनों विदेश सचिवों ने भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच वार्ता के लिए एजेंडा तय किया और फैसला हुआ कि 15 जुलाई को दोनों विदेश मंत्री इस्लामाबाद में बातचीत करेंगे.

उस से पहले सार्क शिखर सम्मेलन के अवसर पर भूटान में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुलाक़ात की और बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई.

इस्लामाबाद में दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक के बाद भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम सार्क सम्मेलन में भाग लेने केलिए इस्लामाबाद पहुँचे और अपने समकक्ष रहमान मलिक से मुलाक़ात की और मुंबई हमलों के अभियुक्तों को न्याय के कटघरे कर पहुँचाने के लिए दबाव डाला.

जुलाई में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने इस्लामाबाद में बातचीत की लेकिन वह भी सफल नहीं रही.

डेविड हेडली और मुंबई हमलावरों के पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों से संबंध निश्चित रुप से बातचीत की नाकामी के कारण बने. अब दोनों देशों वार्ता की नाकामी के लिए एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.

राजनीतिक गहमागहमी

Image caption इस मुलाक़ात के बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चलता रहा

विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ और अन्य राजीनीतिक दलों के भारी दबाव के बाद संसद ने संविधान के 18वें संशोधन को पारित कर राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के अधिकार घटा कर प्रधानमंत्री को दे दिए.

इस वर्ष न्यायपालिका और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी रही. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने भ्रष्टाचार से संबंधी सभी मामले फिर से चलाने के आदेश दिए और इस बीच गृहमंत्री रहमान मलिक और कई दूसरे मंत्रियों के इस्तीफ़े की माँग उठी.

राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी सहित गृहमंत्री रहमान मलिक, क़ानून मंत्री बाबर आवाण और पीपुल्स पार्टी के कई सांसदों के ख़िलाफ भ्रष्टाचार के मुक़दमे दर्ज हैं.

पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने कई बार संकट का सामना किया और गठबंधन सरकार में शामिल अन्य दलों के साथ कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए. आख़िरकार जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फ़ज़लुर्रहमान गुट सरकार से अलग हो गई.

इस साल सुरक्षा बलों का चरमपंथियों के ख़िलाफ़ क़बायली इलाक़ों में अभियान जारी रहा और सेना ने कई वरिष्ठ तालिबान नेताओं को मारने का दावा किया.

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