पाकिस्तान में राजनीतिक संकट

ज़रदारी और गिलानी
Image caption पीपुल्स पार्टी के ज़रदारी इस समय देश के राष्ट्रपति भी हैं.

पाकिस्तान में पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार पर संकट पैदा हो गया है क्योंकि सरकार की सहयोगी मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) ने समर्थन वापस लेने की घोषणा की है.

एमक्यूएम के 25 सांसद हैं और दो केंद्रीय मंत्री हैं. एमक्यूएम के केंद्रीय मंत्री मंगलवार को त्यागपत्र देंगे.

एमक्यूएम और पीपुल्स पार्टी के बीच पिछले कई महीनों से कराची की स्थिति को लेकर मतभेद चल रहे थे और इन्हीं मुद्दों पर एमक्यूएम ने समर्थन वापसी का फ़ैसला किया है.

कराची में पिछले कई महीनों से कथित रुप से आम लोगों की हत्याएं हो रही हैं. पीपुल्स पार्टी का कहना है कि इन हत्याओं के पीछे एमक्यूएम और अवामी नेशनल पार्टी का हाथ है. एमक्यूएम इन आरोपों से इंकार करती रही है.

कराची सिंध प्रांत में आता है और सिंध प्रांत में भी पीपुल्स पार्टी और एमक्यूएम की साझा सरकार है.

कराची और उसके आसपास का इलाक़ा एमक्यूएम का गढ़ माना जाता है. एमक्यूएम विभाजन के बाद भारत से आए लोगों का नेतृत्व करती है.

एमक्यूएम का कहना है कि कराची में हो रही हत्याओं के लिए कबायली इलाक़ों से आए लोग ज़िम्मेदार हैं. एमक्यूएम ने कई बार सरकार से अपील की है कि कराची का तालिबानीकरण हो रहा है जिसके कारण स्थिति ख़राब हो रही है लेकिन सरकार ने इस मामले में कुछ नहीं किया है.

एमक्यूएम के समर्थन वापस लेने से पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक संकट की स्थिति पैदा हो सकती है.

इससे पहले जमीयत उलेमा ए इस्लाम ने भी केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.

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