ईश-निंदा क़ानून को लेकर हड़ताल

  • 31 दिसंबर 2010
प्रदर्शनकारी

पाकिस्तान में ईश निंदा क़ानून में संभावित बदलावों के विरोध में कई शहरों में हड़ताल रखी गई है. प्रदर्शनकारियों ने कराची में यातायात को बाधित किया और वहाँ बसें वगैरह भी नहीं चली.

धार्मिक मामलों के मंत्री सईद ख़ुरशीद शाह ने हालांकि ये बयान दिया था कि सरकार क़ानून में बदलाव नहीं कर रही है लेकिन इसके बावजूद कई धार्मिक पार्टियाँ हड़ताल में हिस्सा ले रही हैं.

ईश-निंदा कानून के तहत क़ुरान, पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद और इस्लाम से संबंधित कुछ पवित्र शख़्सियतों के बारे में निंदनीय बात कहने पर मौत की सज़ा का प्रावधान है.

पाकिस्तान में एक वर्ग का मानना है कि कई मामलों में इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल भी किया जाता है.

चिंता

Image caption कुछ दिन पहले आसिया बीबी को ईश-निंदा के आरोप में मौत की सज़ा मिली है.

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने भी पाकिस्तान सरकार से ईश-निंदा क़ानून को ख़त्म करने की माँग की है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये आशंका जताई जाती रही है कि इस क़ानून के तहत कभी-कभी झूठे आरोप लगाए जाते हैं ताकि किसी से दुश्मनी निकाली जा सके या अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काई जा सके.

पंजाब प्रांत के ज़िले ननकाना साहब की स्थानीय अदालत ने कुछ दिन पहले ईश्वर की निंदा करने के आरोप में एक ईसाई महिला आसिया बीबी को मौत की सज़ा सुनाई है. इस आरोप में किसी महिला को सज़ा सुनाने की यह पहली घटना है.

पाकिस्तान में ऐसे कितने ही मामले सामने आए हैं जहाँ लोगों ने कथित तौर पर ईश-निंदा करने वालों को पीट-पीट कर मार डाला है.

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