एमक्यूएम ने समर्थन वापस लिया

ज़रदारी और एमक्यूएंम
Image caption राष्ट्रपति ज़रदारी ने एमक्यूएम नेताओं से बैठक की

पाकिस्तान सरकार की एक महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट से सरकार से समर्थन वापस ले लिया है.

मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के नेता हैदर अब्बास रिज़वी ने बीबीसी को बताया कि पार्टी ने केंद्र में पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया है और अब वो विपक्ष में बैठ कर केंद्र के अच्छे कामों का समर्थन करते रहेंगे.

नेशनल एसेंबली में एमक्यूएम के पास 25 सांसद हैं जबकि ऊपरी संसद यानी सीनेट में उनके छह सांसद हैं.

एमक्यूएम की समर्थन वापसी से सरकार अल्पमत में आ गई है लेकिन प्रधानमंत्री युसुफ रज़ा गिलानी का कहना है कि उनकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं है.

गिलानी का कहना है कि उनके पास और भी विकल्प मौजूद हैं और उनकी सरकार सत्ता में बनी रहेगी.

एमक्यूएम का कहना है कि कराची के मामले को लेकर उन पर जनता का भारी दबाव था कि वो इस सरकार को दिए जा रहे समर्थन पर कोई फ़ैसला करे.

मतभेद

एमक्यूएम और पीपुल्स पार्टी के बीच पिछले कई महीनों से कराची की स्थिति को लेकर मतभेद चल रहे थे और इन्हीं मुद्दों पर एमक्यूएम ने समर्थन वापसी का फ़ैसला किया है.

कराची में पिछले कई महीनों से कथित रुप से आम लोगों की हत्याएं हो रही हैं. पीपुल्स पार्टी का कहना है कि इन हत्याओं के पीछे एमक्यूएम और अवामी नेशनल पार्टी का हाथ है. एमक्यूएम इन आरोपों से इंकार करती रही है.

कराची सिंध प्रांत में आता है और सिंध प्रांत में भी पीपुल्स पार्टी और एमक्यूएम की साझा सरकार है.

कराची और उसके आसपास का इलाक़ा एमक्यूएम का गढ़ माना जाता है. एमक्यूएम विभाजन के बाद भारत से आए लोगों का नेतृत्व करती है.

एमक्यूएम का कहना है कि कराची में हो रही हत्याओं के लिए कबायली इलाक़ों से आए लोग ज़िम्मेदार हैं. एमक्यूएम ने कई बार सरकार से अपील की है कि कराची का तालिबानीकरण हो रहा है जिसके कारण स्थिति ख़राब हो रही है लेकिन सरकार ने इस मामले में कुछ नहीं किया है.

इससे पहले जमीयत उलेमा ए इस्लाम ने भी केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.

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