ईश-निंदा के आरोप में बाप बेटे को सज़ा

ईश-निंदा
Image caption पाकिस्तान में ईश-निंदा क़ानून में संशोधन के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं.

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की एक स्थानीय अदालत ने पैगंबर की निंदा करने के आरोप में मस्जिद के इमाम और उनके बेटे को आजीवन कारावास और जुर्माने की सज़ा सुनाई है.

ज़िला डेरा ग़ाज़ी ख़ान की आतंकवाद निरोधक अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने का भुगतान न करने की स्थिति में अभियुक्तों को छह-छह महीने क़ैद की भी सज़ा सुनाई.

अदालत के जज राओ अयूब ख़ान ने यह आदेश कोट अद्दू इलाक़े के निवासी मोहम्मद शफ़ी और उन के बेटे असलम के ख़िलाफ़ दर्ज मुक़दमे पर फ़ैसला सुनाते हुए दिया. मोहम्मद शफ़ी एक मस्जिद में इमाम हैं और नमाज़ पढ़ाते हैं.

अदालत ने पैगंबर की निंदा करने के आरोप में 10-10 साल जबकि आतंकवाद निरोधर क़ानून के तहत 15-15 साल क़ैद की सज़ा भी सुनाई.

अभियुक्त मोहम्मद शफ़ी और उनका बेटा असलम पिछले आठ महीनों से डेरा ग़ाज़ी ख़ान की जेल में क़ैद हैं.

अभियुक्तों के वकील आरिफ़ गोरमानी ने बीबीसी को बताया कि मोहम्मद शफ़ी और उन के बेटे के ख़िलाफ़ पिछले साल अप्रेल में ईश-निंदा के आरोप में मुक़दमा दर्ज किया गया था.

उन के अनुसार एक स्थानीय व्यक्ति फ़ूल ख़ान ने मुक़दमा दर्ज करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी.

वकील आरिफ़ गोरमानी के अनुसार मोहम्मद शफ़ी और उन के बेटे पर आरोप है कि उन्होंने ऐसे पोस्ट फ़ाड़ दिए थे जिस पर इस्लाम के पैग़म्बर मोहम्मद का नाम लिखा हुआ था.

मौत की सज़ा

आरिफ़ गोरमानी ने बताया कि वे इस सज़ा के ख़िलाफ लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे.

ग़ौरतलब है कि ईश-निंदा कानून के तहत क़ुरान,पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद और इस्लाम से संबंधित कुछ पवित्र शख़्सियतों के बारे में निंदनीय बात कहने से मौत की सज़ा हो सकती है.

पाकिस्तान में एक वर्ग का मानना है कि कई मामलों में इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल भी किया जाता है.

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