'पाक से अफ़ग़ान तालिबान को मदद'

रिचर्ड मिल्ज़

अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल रिचर्ड पी मिल्ज़ ने कहा है कि दुर्भाग्य से तालिबान विद्रोहियों के लिए ज़्यादा मदद पाकिस्तान से आ रही है.

उन्होंने अफ़गानिस्तान से टेलीफ़ोन पर बीबीसी को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा, “पाकिस्तानी सीमा एक बहुत बड़ी समस्या है और हम अफ़गानिस्तान के चरमपंथियों के लिए ज़्यादा मदद पाकिस्तान से देख रहे हैं. हम ने दुनिया के दूसरे इलाक़ों के चरमपंथी नहीं देखे हैं.”

उन्होंने बताया कि वे पाकिस्तानी सेना के साथ मिल कर तालिबान के ख़िलाफ़ सफल कार्रवाईयां कर रहे हैं ताकि वह अफ़ग़ानिस्तान में न लौट सकें और उन्हें क्वेटा जैसे स्थानों में छिपने न दें.

मेजर जनरल रिचर्ड मिल्ज़ के अनुसार चरमपंथी न केवल अफ़ग़ानिस्तान बल्कि पाकिस्तान के लिए भी समस्या है, उन्होंने इस्लामाबाद जैसी जगहों पर हमले किए और वह पाकिस्तान के दोस्त नहीं हैं.

मेजर जनरल रिचर्ड मिल्ज़ अमरिकी 'मरीन्स फ़ोर्स' के वरिष्ठ अधिकारी हैं और उन्हें पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत में नियुक्त किया गया था. वे 20 हज़ार अमरिकी और आठ हज़ार ब्रितानी सैनिकों के साथ हेलमंद प्रांत में मौजूद हैं.

पाकिस्तान और ईरान की सीमा पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “अफ़ग़ानिस्तान के सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा पर अवैध आवाजाही को रोकना होगा और हम चाहते हैं कि दोनों देशों की सीमा को बंद कर दिया जाए.”

कठिन इलाक़े

उन्होंने आगे कहा, “वह मुश्किल पहाड़ी इलाक़े हैं जहाँ वे छिप सकते हैं और हम अभी तक उन के इलाक़ों तक नहीं पहुँच सके हैं लेकिन हमें उम्मीद है कि जल्द पहुँच जाएंगे.”

सैन्य अधिकारी का कहना है कि हेलमंद में पिछले सात महीनों के भीतर स्थिति बेहतर हो रही है और सैन्य अभियान के बाद प्रांत के कई इलाक़े उन के नियंत्रण में हैं.

स्थानीय तालिबान विद्रोहियों ने जनरल रिचर्ड मिल्ज़ की बातों का खंडन किया है.

मेजर जनरल मिल्ज़ के अनुसार अब युद्ध समाप्त हो चुका है और यहाँ स्थिति धीरे-धीर सामान्य हो रही है. स्थानीय लोग भी अंतरराष्ट्रीय सेना की मदद कर रहे हैं और ज़रूरत पड़ने पर जानकारी दे देते हैं.

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