एसएमएस में भारत से आगे पाकिस्तान

  • 22 जनवरी 2011
एस एम एस
Image caption पाकिस्तान में युवा पीढ़ी और शहरों में एसएमएस का प्रचलन काफ़ी बढ़ा है.

हाल ही में पाकिस्तान में मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल करने वालों की संख्या दस करोड़ पहुंच गई है. दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान में बहुत से लोग मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल बात करने से ज़्यादा एसएमएस के लिए करते हैं.

पाकिस्तान के दूरसंचार विभाग 'पाकिस्तान टेलीकॉम ऑथोरिटी' की ओर से प्रकाशित एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया भर में एसएमएस भेजने के मामले में पाकिस्तान पांचवें नंबर पर है.

इस रिपोर्ट को ब्रिटेन स्थित एक मार्केटिंग सर्वेक्षण कंपनी 'पोर्टियो' ने तैयार किया है.

वर्ष 2001 से 2010 के दौरान जब पीटीए ने इस क्षेत्र में छूट दी तो पाकिस्तान में मोबाइल फ़ोन की सुविधा हासिल करने वालों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई और पिछले ही हफ़्ते यह संख्या 10 करोड़ के पार पहुंच गई है.

बढ़ती महंगाई और कम साक्षारता दर के बावजूद पाकिस्तान अमरीका, ब्रिटेन और स्वीडन जैसे विकसित देशों से ज़रा ही पीछे है. यह दक्षिण एशिया की बेहतर अर्थव्यवस्था वाले देश भारत से भी आगे है जहां मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या क़रीब 70 करोड़ है.

इसके बावजूद पीटीए के प्रवक्ता ख़ुर्रम मेहरान का कहना है, "इस क्षेत्र में अधिक वृद्धि का वजह पाकिस्तान में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने वालों की संख्या है. यहां 61 प्रतिशत लोगों के पास मोबाइल है और ये एशिया में सबसे ज़्यादा है."

क्या हैं कारण?

आख़िर पाकिस्तान में एसएमएस का इतना प्रचलन क्यों है कि भारत जैसा देश भी पीछे हैं.

एक पाकिस्तानी अख़बार ने तो इस रुझान को देखते हुए पाकिस्तान का नाम "टेक्स्ट रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान" कहा है.

पाकिस्तान के शहरों में सूचना का पहला माध्यम एसएमएस बन चुका है. कोई घटना हो या आतंकवादी हमला हो इसका इस्तेमाल होता है.

इस्लामाबाद की एक छात्रा 20 वर्षीय नवल का कहना है, "पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की ख़बर सामाचार में आने से पहले एसएमएस के ज़रिए हम तक पहुंच चुकी थी. मैं जब इस्लामाबाद से मोटरकार चलाते हुए लाहौर जा रही थी कि मेरे दोस्त ने मुझे एसएमएस किया कि सलमान तासीर की हत्या कर दी गई है."

पीटीए के प्रवक्ता ख़ुर्रम मेहरान का कहना है, "मोबाइल कंपनियां ऐसे पैकेज दे रही हैं जिससे एसएमएस का प्रयोग बहुत ज़्यादा हो रहा है."

ये एक सच है कि एसएमएस सामाजिक संपर्क का ज़रिया भी बन चुका है. पाकिस्तान के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विषयों के टीकाकार फ़सीह ज़का ने कहा, "पाकिस्तान में किसी भी उत्सव के मौक़े पर इतने एसएमएस आते हैं कि ट्रेफ़िक बंद हो जाती है."

लतीफ़े के लिए सज़ा

Image caption एसएमएस का इस्तेमाल सिर्फ़ प्यार मोहब्बत के लिए नहीं...

उन्होंने ये भी कहा कि जब एक वर्ग के लोग अपने दोस्तों को एक लतीफ़ा या एक ही ख़बर भेजते हैं तो एसएमएस उनके लिए सामूहिक अहसास का हिस्सा बन जाता है.

आज भी लतीफ़े निजी संदेश में काफ़ी अहमियत रखते हैं. वर्ष 2009 में राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ लतीफ़ा भेजने पर पाबंदी का सरकारी अदेश जारी हुआ था और उस पर साइबर जुर्म के तहत सज़ा दिए जाने की घोषणा की गई थी.

हालांकि इसे लागू नहीं किया जा सका लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि इस संदर्भ में कई और नए लतीफ़ों ने जन्म ले लिया.

पाकिस्तान में करोड़ों उपभोक्ता एर दूसरे को एसएमएस भेजते हैं. लेकिन इनसे सिर्फ़ सामाजिक रिश्ते बनते नहीं बल्कि बिगड़ते भी हैं.

पाकिस्तान जैसे रूढ़िवादी देश में जहां महिलाओं और पुरूषों के बीच संपर्क बहुत कम हैं वहां एसएमएस के ज़रिए बेनाम बनकर किसी महिला तक पहुंचना या उन्हें परेशान करना आसान हो जाता है.

फ़सी ज़का का कहना है, "यह इलेक्ट्रानिक चिट की तरह है जो मोबाइल के प्रचलन से पहले लड़के लड़कियों पर बाज़ारों में फेंका करते थे."

एक 19 वर्षीय छात्रा सेहरीश का कहना है, "हमें दोस्ती के लिए बहुत सारे मेसेज आते हैं यहां तक कि पीछा करने वालों के भी एसएमएस आते हैं."

व्यापार के लिए

डिजिटल रोमांस के अलावा यहां साइबर अपराध का मामला भी है. पाकिस्तान की जांच एजेंसी के मुताबिक़ एसएमएस के ज़रिए मिलने वाली धमकियों की भी शिकायतें मिली हैं और कई तरह की धोखेबाज़ी भरी योजनाओं की भी शिकायत मिली है लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

निजी पैग़ाम पहुंचाने के अलावा एसएमएस में विकास की एक बड़ी वजह उसका व्यवसायिक इस्तेमाल भी है.

इस बारे में पीटीए के प्रवक्ता ने कहा, "मोबाइल बैंकिंग ऐसा विभाग है जो तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहा है, इसके अलावा छोटे कारोबारी लोग एसएमएस का इस्तेमाल विज्ञापन के तौर पर कर रहे हैं."

कराची के हैदरी इलाक़े में एक रिहाइशी बंगले में बिग बाज़ार के नाम से एक ऐसा ही छोटा कारोबार है जो एक साल पहले शुरू हुआ था. उसमें सिर्फ़ आठ लोग काम करते हैं.

कंपनी के उपभोक्ता विभाग के प्रमुख समीर मलिक ने बताया कि बिग बाज़ार ने एसएमएस मार्केटिंग क्यों शुरू की, "एसएमएस मार्केटिंग में भारत और दूसरे देशों में बहुत काम हुआ है और इससे उनकी सेवा की क़ीमत बहुत कम हुई है और आमदनी बढ़ी है."

बिग बाज़ार के 200 ग्राहक हैं और समीर का कहना है, "एसएमएस मार्केटिंग का बहुत कारगर तरीक़ा है. इससे तुरंत नतीजा मिलता है. दूसरी ओर छोटे कारोबारी अख़बार या टीवी पर इतना ख़र्च नहीं कर सकते मगर नई दुकान या होटल के प्रचार के लिए वे एसएमएस का सहारा लेते हैं."

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