पाकिस्तान: ईशनिंदा क़ानून में संशोधन का बिल वापस लिया

शेरी रहमान
Image caption शेरी रहमान ने ये निजी बिल नवंबर में पेश किया था.

पाकिस्तान के ईशनिंदा क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव करने वाले एक बिल को वापस ले लिया गया है.

सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सांसद शेरी रहमान ने ये निजी बिल पिछले साल नवंबर में पेश किया था. इस बिल में ईशनिंदा के अभियुक्तों के क़ानूनी अधिकारों को बेहतर करने का प्रस्ताव था.

ये बिल उस ईसाई महिला के मामले के बाद आया था, जिसमें उसे ईशनिंदा के लिए मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर ने ईशनिंदा क़ानून में संशोधन का समर्थन किया था जिसके उनकी हत्या कर दी गई थी.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी ने बुधवार को पाकिस्तानी संसद को बताया कि उनकी पार्टी की सांसद शेरी रहमान ईशनिंदा क़ानून में संशोधन को लेकर जो बिल पेश किया उसे वापस ले लिया है.

'कोई विकल्प नहीं बचा'

इस निजी बिल को संसद में लाने वाली सांसद शेरी रहमान ने बयान जारी कर कहा है कि वो अपनी पार्टी के इस बिल को वापस लेने पर सहमत नहीं थीं.

उन्होंने बयान में कहा, "बिल को वापस लेने का सवाल ही उठता क्योंकि स्पीकर ने इस कभी अपने एजेंडे में शामिल ही नहीं किया. जब प्रधानमंत्री ने ये कहा कि इस मुद्दे पर बहस भी नहीं हो सकती, तब मेरे पास पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के प्रतिनिधि होने के नाते दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा था. "

शेरी रहमान ने कहा कि अतिवाद के तुष्टिकरण करने का नुकसान भी हो सकता है.

रहमान ने अपने बयान में कहा है कि अगर स्पीकर बिल को पेश होने देते तो शायद सांसदों को पता चल पाता कि इसका मक़सद ईशनिंदा क़ानून को ख़त्म करना नहीं था.

उन्होंने कहा कि प्रश्न उस धर्म के नाम पर अन्याय रोकने का है जो शांति और सहनशीलता की कद्र करता है.

पाकिस्तान के ईश-निंदा क़ानून के तहत क़ुरान, पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद और इस्लाम से संबंधित कुछ पवित्र शख़्सियतों के बारे में निंदनीय बात कहने से मौत की सज़ा हो सकती है.

पाकिस्तान में एक वर्ग का मानना है कि कई मामलों में इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल भी किया जाता है.

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