रेमंड मामले पर पीपीपी में मतभेद उभरे

क़ुरैशी
Image caption राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी कहते रहे हैं कि रेमंड के राजनयिक संरक्षण का फ़ैसला अदालत ही करेगी.

पाकिस्तान के सत्ताधारी दल पीपुल्स पार्टी की सदस्य फ़ौज़िया वहाब के इस्तीफ़े के बाद पार्टी के सह-अध्यक्ष और राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने पूर्व सूचना मंत्री कमर ज़मान क़ायरा को पार्टी का प्रवक्ता नियुक्त कर दिया है.

फ़ौज़िया वहाब ने शनिवार को अपने पद ने इस्तिफ़ा दे दिया था.

शुक्रवार को राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की अध्यक्षता में पीपुल्स पार्टी की उच्चस्तरीय बैठक हुई थी जिस में फ़ौज़िया वहाब और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी को नहीं बुलाया गया था.

फ़ौज़िया वहाब ने कराची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने निजी कारणों ने पार्टी की सूचना सचिव के पद से इस्तीफ़ा दिया है और वे एक सदस्य की हैसियत से पार्टी के लिए काम करती रहेंगी.

विवादास्पद बयान

ग़ौरतलब है कि फ़ौज़िया वहाब ने अमरिकी अधिकारी रेमंड डेविस के मामले पर विवादास्पद बयान दिए थे जिस पर पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज़ है.

फ़ौज़िया वहाब ने एक पत्रकार वार्ता में कहा था कि पाकिस्तानी क़ानून की अनुसार अमरिकी अधिकारी रेमंड डेविस को राजनयिक संरक्षण प्राप्त है और उन्हें हिरासत में नहीं रखा जा सकता.

जबकि पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस मामले पर बात करते हुए था कि उन्हें विदेश मंत्रालय से जानकारी दी गई थी जिसके अनुसार अमरिकी अधिकारी रेमंड डेविस को राजनयिक संरक्षण प्राप्त नहीं है.

फ़ौज़िया वहाब के मुताबिक रेमंड डेविस पर बयान उनकी निजी राय थी और उनका बयान पीपुल्स पार्टी की नीति को नहीं दर्शाता.

लाहौर में गिरफ़्तार अमरीकी अधिकारी रेमंड डेविस पर राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी, प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और विदेश मंत्रालय कहते रहे हैं कि अमरिकी अधिकारी का मामला अदालत में चल रहा है और उनके राजनयिक संरक्षण का फ़ैसला अदालत ही करेगी.

अमरीका का दबाव

अमरीकी नागरिक रेमंड डेविस ने 27 जनवरी को लाहौर की एक भीड़ भरी सड़क पर दो पाकिस्तानी लोगों को गोली मार दी थी.

पुलिस ने घटना के तुरंत बाद उन्हें हिरासत में ले लिया था और उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया था. पुलिस ने 28 जनवरी को उन्हें लाहौर की एक निचली अदालत में पेश किया था.

रेमंड डेविस ने अदालत में अपना बयान दिया था कि उन्होंने जानबूझ कर उन लोगों की हत्या नहीं की और उनकी जान को ख़तरा है कि इसलिए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए.

घटना के कुछ दिनों बाद अमरीका ने कहा था कि पाकिस्तान ने ग़ैर-क़ानूनी तौर पर उसके अधिकारी को हिरासत में रखा है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी उल्लंघन है.

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