शहबाज़ भट्टी का जीवन परिचय

  • 2 मार्च 2011
शहबाज़ भट्टी इमेज कॉपीरइट BBC World Service

पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शहबाज़ भट्टी को अज्ञात सशस्त्र चरमपंथियों ने इस्लामाबाद में क़त्ल कर दिया.शहबाज़ भट्टी का जन्म नौ सितंबर 1968 में हुआ था.

मंत्री बनने के बाद भी वे अपनी माँ से मिलने के बाद ही अपनी दिनचर्या की शुरूआत किया करते थे. बुधवार को भी वे अपनी माँ से मिलने के बाद रोज़ की तरह केंद्रीय मंत्रालय की बैठक में भाग लेने के लिए जा रहे थे. तभी तीन सशस्त्र व्यक्तियों ने उनकी गाड़ी रोककर गोली मार कर उनकी हत्या कर दी.

पुलिस के अनुसार जब वह अपनी मां से मिलने जाते थे तो आदर स्वरूप अपने पुलिस एसकॉर्ट को साथ नहीं ले जाते थे.

कैथोलिक मत में विश्वास रखने वाले शहबाज़ भट्टी ने पहले क्रिश्चियन लिब्रेशन फ़्रंट बनाया और उसके बाद ऑल पाकिस्तान अल्पसंख्यक गठबंधन बनाया.

17 करोड़ की जनसंख्या वाले मुस्लिम बहुल देश पाकिस्तान में हिंदुओं के बाद ईसाई दूसरे बड़े अल्पसंख्यक हैं. उनकी जनसंख्या लगभग 28 लाख है.

लोकप्रिय नेता

शहबाज़ भट्टी अल्पसंख्यकों की समस्याओं के हल, धर्मों के बीच समन्वय और मानवाधिकारों के लिए काम करते रहे. इन्हीं कोशिशों के लिए फ़िनलैंड, अमरीका और कनाडा ने उन्हें पुरस्कृत भी किया.

दिवंगत केंद्रीय मंत्री का राजनीतिक संबंध पीपुल्स पार्टी से रहा और वह बेनज़ीर भुट्टो के बहुत क़रीब थे. वर्ष 2002 के चुनाव में उन्होंने अपने बजाए ऑल पार्टी अल्पसंख्यक गठबंधन के प्रोफ़ेसर मुश्ताक़ विक्टर को सदस्य निर्वाचित करवाया था.

प्रोफ़ेसर मुश्ताक़ बाद में परवेज़ मुशर्रफ़ की ओर से पीपुल्स पार्टी से अलग होने वाले गुट के साथ पैट्रियट ग्रुप में शामिल हो गए.

उसके बाद साथियों के कहने पर 2008 के चुनाव में अल्पसंख्यक की सुरक्षित सीट पर पीपुल्स पार्टी के टिकट पर शहबाज़ भट्टी निर्वाचित हुए.

शहबाज़ भट्टी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के मंत्रिमंडल में 2008 में शामिल हुए थे.पिछले महीने जब मंत्रिमंडल ने इस्तीफ़ा दिया और दोबारा 21 सदस्य टीम ने शपथ ली तो उसमें भी वह शामिल थे.

शहबाज़ भट्टी आम तौर पर अपने धर्म का सबसा बड़ा त्योहार क्रिस्मस जेल में क़ैदियों के साथ मनाते या फिर विकलांगों के साथ समाज के निचले और पीड़ित समुदाय के साथ मनाते थे.

उन्होंने पिछले साल विभिन्न धर्मों में मेल मिलाप पर कॉंफ़्रेंस करवाई जिसमें पाकिस्तान में हर विचारधारा, धार्मिक गुटों और अलेमा के सुझाव पर एक घोषणा पत्र तैयार किया.

शहबाज़ भट्टी अल्पसंख्यकों के विरुद्ध भेदभाव पूर्ण क़ानून ख़त्म करने और ईशनिंदा समेत ऐसे सारे क़ानून ख़त्म कराने के पक्ष में थे जिन्हें किसी तानाशाह ने शुरू किया था.

शहबाज़ भट्टी उनमें संशोधन कराने की सदा मांग करते रहे.

ख़तरे के बादल

पिछले साल एक ईसाई महिला आसिया बीबी को ईशनिंदा क़ानून के तहत एक मुक़दमे में सज़ा सुनाई गई थी. उस वक़्त पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर और शहबाज़ भट्टी ने भी उस क़ानून के ग़लत इस्तेमाल को रोकने के लिए उसमें संशोधन का आभियान चलाया था.

उसके बाद पाकिस्तान में धार्मिक गुटों ने इस अभियान के विरुद्ध ज़बर्दस्त आंदोलन चलाया. इस आंदोलन ने उस वक़्त और ज़ोर पकड़ लिया जब मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने सरकार से अलग होकर अभियान का समर्थन किया.

पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की उनके सुरक्षा गार्ड ने चार जनवरी को इस्लामाबाद में गोली मार कर हत्या कर दी.

शहबाज़ भट्टी ने जहां उनकी हत्या की कड़ी आलोचना की थी वहीं उनकी याद में कई प्रोग्राम भी आयोजित कराए. इसके बाद उनकी ज़िंदगी पर ख़तरे के बादल मंडराने लगे.

शहबाज़ भट्टी के कुछ दोस्तों और परिजनों ने उन्हें कुछ दिनों तक देश से बाहर रहने की सलाह दी थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

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