'खेल को खेल रहने दें तो अच्छा है'

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Image caption पाकिस्तानी टीम अपना सेमीफ़ाईनल भारत के ख़िलाफ खेल रही है.

क्रिकेट विश्व कप के दूसरे सेमीफ़ाईनल में पाकिस्तान और भारत आमने सामने क्या आए हैं, कई लोगों के भाग्य जाग गए हैं.

पाकिस्तान की जेल में पिछले 27 सालों से क़ैद भारतीय नागरिक को रिहाई की ख़ुशी मिली है.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के लोगों केलिए सीमा के उस पार पहली बार वहाँ ज़्यादा समय रहने की अनुमति मिली है.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को भारतीय न्योते पर मोहाली जाने और वहाँ अपने भारतीय समकक्ष मनमोहन सिंह के साथ मैच का आनंद लेने का अवसर मिला है जबकि अपने पाकिस्तानियों के हाथों मुंबई पर आंतकवादी हमलों के करीब ढाई सालों बाद पाकिस्तानियों की एक बड़ी संख्या को अपने पड़ोसी देश भारत जाने का मौक़ा भी मिला है.

'अच्छी ख़बर'

और सब से बड़ी बात यह है कि पाकिस्तानी जनता को आत्मघाती हमलों, विकीलीक्स, भ्रष्टाचार, राजनीतिक टकराव, बाढ़ का विनाश, विवादास्पद पाकिस्तानी क़ानून और रेमंड डेविस जैसे मामलों के बाद कोई अच्छी ख़बर मिली है.

लेकिन कई लोग अपनी आदत से मजबूर इस मज़े को किरकिरा करने या यूँ कहिए कि मज़े लेने केलिए मैदान में कूद पड़े हैं.

शिवसेना के प्रमुख बाल ठाकरे ने अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर बयान कसा है कि जब उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को मैच देखने का न्योता दिया है तो अजमल आमिर कसाब को भी जेल से मोहाली बुला कर मैच दिखा दें.

पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने सेमीफ़ाईनल से दो दिन पहले बयान दिया कि उन की हर खिलाड़ी पर नज़र है कि कोई भी इस बार सट्टेबाज़ी न करने पाए.

'राजनीति नहीं'

पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान भी अपने क्रिकेट के विश्लेषण में राजनीति पर बात करने से बाज़ नहीं आर रहे हैं और भारत में बैठ कर अपने भारत विरोधी विचारों को विश्लेषण में शामिल कर रहे हैं.

कराची के एक मनचले वकील ने तो सिंध हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है कि अदालत मोहाली में हो रहे पाकिस्तान और भारत के बीच सेमी फ़ाईनल रुकवाए क्योंकि बाल ठाकरे पाकिस्तानी टीम के जीतने की सूरत में उस पर हमले की धमकी दे चुके हैं.

याचिकर्ता को विश्वास है कि अगर पाकिस्तान मैच जीता तो इस क्षेत्र में स्थिति बिगड़ जाएगी इसलिए अदालत आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को आदेश दे कि मैच दुबई में कराया जाए.

ख़ुशी की बात यह है पल भर केलिए ही सही लेकिन क्रिकेट के जोश और जुनून ने सब आवाज़ों को दबा दिया है और सीमा की दोनो ओर एक ही इच्छा है कि खेल को खेल की रहने दें तो अच्छा है.

क्योंकि यह खेल ही तो है जिस ने फासलों को कम करने का अवसर प्रदान किया है.

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