'तालिबान पर पाक के पास ठोस योजना नहीं'

तालिबान

अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के पास तालिबान चरमपंथियों से लड़ने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है.

संसद में पेश करने के लिए तैयार की गई नियमित अर्धवार्षित रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन इलाक़ो को अल-क़ायदा से जुड़े लड़ाकों से मुक्त करवाया गया है उन इलाक़ों पर नियंत्रण कायम रखने में भी पाकिस्तानी सेना को संघर्ष करना पड़ रहा है.

मंगलवार को प्रकाशित की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वर्ष जनवरी से मार्च के बीच अफ़ग़ानिस्तान से लगे सीमा के क़बायली इलाक़ों में स्थिति और ख़राब हुई है.

अमरीका चाहता है कि क़बायली इलाक़ों को पनाहगाह की तरह उपयोग में ला रहे और वहाँ से सीमापार अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना पर हमला कर रहे तालिबान को कुचलने के लिए पाकिस्तान कड़े क़दम उठाए.

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब क़बायली इलाक़ों की स्थिति को लेकर अमरीका ने चिंता जताई है. पहले भी अमरीका की ओर से ऐसे बयान आते रहे हैं.

चिंता और सलाह

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार व्हाइट हाउस की इस रिपोर्ट में महमंद और बाजौर इलाक़ों में इस साल जनवरी में तालिबान विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हुए ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ऑपरेशन को विद्रोहियों के प्रतिरोध के अलावा ख़राब मौसम का सामना करना पड़ा.

इसमें चिंता जताई गई है कि जो इलाक़े तालिबान से खाली करवा लिए गए वहाँ सेना अपना नियंत्रण कायम नहीं रख पाई.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, "दो साल में यह तीसरी बार था जब सेना को इस इलाक़े की सफ़ाई के लिए कार्रवाई करनी पड़ी और ये इस बात का सबूत है कि सेना और सरकार इन इलाक़ों में अपना नियंत्रण क़ायम नहीं रख पा रहे हैं जिससे कि विद्रोही वहाँ न लौट सकें."

Image caption रिपोर्ट में पाकिस्तान के सूफ़ी दरगाह पर हुए ताज़ा हमले को सरकार को सेना की विफलता के रुप में पेश किया गया है

ओबामा प्रशासन ने इस रिपोर्ट में कहा है, "एक लाख 47 हज़ार सैनिकों की अभूतपूर्व और सतत तैनाती के बावजूद पाकिस्तान में विद्रोहियों को परास्त करने के लिए कोई साफ़ रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है."

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो इलाक़ा विद्रोहियों से खाली करवाया जाए वहाँ नियंत्रण कायम रखना होगा, ढाँचागत निर्माण करना होगा और स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना होगा, जैसा कि अमरीकी सेना ने इराक़ में सफलता पूर्वक किया है.

इस रिपोर्ट में यह संतोष व्यक्ति किया गया है कि अमरीकी अधिकारी की गिरफ़्तारी के बाद पैदा हुए कूटनीतिक तनाव के बावजूद पाकिस्तान और अमरीकी सेना के बीच तालमेल क़ायम है.

उल्लेखनीय है कि सीआईए से जुड़े एक अधिकारी रेमंड डेविस को दो व्यक्तियों को गोली मारने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया था और बाद में इन मौतों के बदले पैसा देने के बाद ही उनकी रिहाई हो सकी.

हालांकि रेमंड डेविस का कहना था कि ये व्यक्ति उन्हें लूटने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पाकिस्तानी अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं थे.

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