'पाकिस्तान भारत से दोस्ती न करे'

हफ़ीज़ सईद
Image caption हाफ़िज़ सईद जमात उद दावा के प्रमुख हैं.

पाकिस्तान में जमात-उद-दावा के नेता हाफ़िज सईद ने देश के सांसदों से कहा है कि वो भारत के साथ सरकार की दोस्ती का समर्थन न करें.

इस्लामाबाद में हुई एक सभा में हफ़िज़ सईद ने पाकिस्तान सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि भारत के साथ दोस्ती करने से कश्मीर की समस्या हल नहीं हो सकती.

जमात-उद-दावा के कई नेता सोमवार को भारत प्रशासित कश्मीर में वरिष्ठ धार्मिक नेता मौलाना शौक़त अली शाह की हत्या के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे. ये बातें उसी सभा के दौरान कही गईं.

हाफिज़ सईद ने करीब चार मिनट के अपने भाषण में पाकिस्तानी सरकार से मांग की कि वह अपनी कश्मीर नीति का फिर से आकलन करें और कश्मीर की आज़ादी पर कोई समझौता नहीं करें.

हाफ़िज़ सईद का कहना था, “भारत के साथ यह दोस्ती और क्रिकेट डिप्लोमेसी का कोई अर्थ नहीं है, हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम कश्मीर की आज़ादी तक कश्मीरियों का साथ देते रहेंगे. और कश्मीर की आज़ादी ही पाकिस्तान के हित में है.”

सभा में जमात-उद-दावा के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने संबोधन में भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर भारत सरकार की कड़ी आलोचना की.

कड़ा रुख़

हाफ़िज सईद के मुताबिक जब इराक़ और अफग़ानिस्तान में अमरिका को सफलता नहीं मिल सकी तो कश्मीर में भारत को कैसे मिलेगी. उन्होंने कहा कि अब मु्सलमान अपने मिशन को समझ चुके हैं.

उन्होंने कहा, “अगर रुस अफ़ग़ानिस्तान पर अपना क़ब्ज़ा नहीं रखा सका, अगर अमरीका आज वापसी की तैयारी कर रहा है और अपना नियंत्रण नहीं रख सकते तो भारत भी कश्मीर पर अपना क़ब्ज़ा बरक़रार नहीं रख सकता.”

इस्लामाबाद प्रेस क्लब के सामने हुई सभा में हाफ़िज़ सईद ने मौलाना शौक़त शाह की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई.

नमाज़े जनाज़ा के दौरान प्रेस क्लब के सामने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और जमात-उद-दावाके सुरक्षाकर्मियों ने किसी अज्ञात व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं दी.

भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में आठ अप्रैल को एक मस्जिद के बाहर हुए धमाके में जाने-माने धार्मिक नेता मौलवी शौकत शाह की मौत हो गई थी.ये धमाका शुक्रवार की नमाज़ से कुछ देर पहले हुआ था. इस धमाके में एक स्कूली बच्ची और एक स्थानीय महिला घायल हो गई थी.

54 वर्षीय मौलवी शौकत शाह एक धार्मिक संगठन जमात-ए-अहले-हदीस का नेतृत्व कर रहे थे. वे शीर्ष अलगाववादी नेता यासीन मलिक के क़रीबी थे.

शौकत शाह पर पहले भी दो बार हमले हुए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से दो गार्ड उनकी सुरक्षा में लगाए थे.

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