आतंकवाद से 2500 मरे, ड्रोन से 900

  • 14 अप्रैल 2011
बम हमले
Image caption बम हमलों ने भी सैंकड़ों लोगों की जान ली.

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग का कहना है कि आतंकवाद पाकिस्तान की सब से बड़ी समस्या है और पिछले साल हुई घटनाओं में 2500 से अधिक लोग मारे गए.

संस्था के प्रमुख डॉक्टर मेहदी हसन ने वर्ष 2010 की रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि पिछले साल देश के विभिन्न शहरों में हुई आतंकवादी घटनाओं में 2500 से ज़्यादा लोग मारे गए जिस में से 1100 से अधिक लोग आत्मघाती हमलों में मारे गए.

उनके अनुसार पिछले साल क़बायली इलाक़ों में हुए अमरीकी मानवरहित विमानों के हमलों में 900 से अधिक लोग मारे गए.

डॉक्टर मेहदी हसन ने बताया कि बलूचिस्तान प्रांत की स्थिति भी गंभीर होती जा रही है और सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है जिसकी वजह से स्थिति और ख़राब हो रही है.

रिपोर्ट में बताया गया कि बलूचिस्तान में पिछले साल 117 घटनाओं में करीब एक सौ लोग मारे गए जिनमें अधिकतर बलोच नागरिक थे.

'ईश-निंदा के आरोप'

संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिछले साल हिंसक घटनाओं में 99 अहमदी समुदाय के लोग मारे गए जबकि अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाईयों में लिप्त लोगों को कोई सज़ा नहीं मिल सकी.

रिपोर्ट के अनुसार करीब 64 लोगों के ख़िलाफ़ ईश-निंद के आरोप लगे जिस में एक ईसाई महिला आसिया बीबी भी शामिल हैं.

इस में रिपोर्ट में बताया गया कि क़बायली इलाक़े औरकज़ई एजेंसी की बिगड़ी हुई स्थिति के कारण करीब दो सौ सिख परिवार इलाक़ा छोड़ कर चले गए जबकि करीब पांच सौ हिंदु परिवार बलूचिस्तान के विस्थापित हो कर भारत चले गए.

संस्था का कहना है कि पिछले साल करीब 20 पत्रकार भी आतंकवादी हमलों के निशाना बने और उन्हें अपने काम के दौरान सुरक्षाबलों की ओर से धमकियाँ भी मिली.

Image caption पिछले साल 64 लोगों के ख़िलाफ़ ईश-निंदा के आरोप लगे.

'इज़्ज़त के नाम पर हत्याएँ'

वर्ष 2010 महिलाओं केलिए भी ख़तरनाक सिद्ध हुआ. रिपोर्ट में अनुसार सात सौ के अधिक महिलाओं की देश के विभिन्न इलाक़ों में इज़्ज़त के नाम पर हत्या की गई जबकि 29 सौ से अधिक महिलाओं को हिंसा निशाना बनाया गया.

पाकिस्तानी सरकार ने पिछले साल स्वास्थ्य के क्षेत्र पर भी ध्यान नहीं दिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद का केवल 0.54 प्रतिशत इस पर ख़र्च किया.

जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता आईए रहमान ने बीबीसी ने बात करते हुए कहा कि इस समय बलूचिस्तान पाकिस्तान की सब से बड़ी समस्या है और सरकार को उस पर ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान की शिकायत बहुत पुरानी है क्योंकि बलूचिस्तान के साथ हमेशा नाइंसाफ़ी हुई और प्रांत के संसाधनों पर बलोच लोगों का अधिकार नहीं माना जाता.

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