ऐबटाबाद से आंखो देखी

  • 2 मई 2011
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Image caption ऐबटाबाद में अब सुरक्षा अत्यंत कड़ी कर दी गई है और वाहनों की तलाशी हो रही है.

अमरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमावर की सुबह अल-क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में मार गिराने की बात कही तो मेरा माथा ठनका.

ऐबटाबाद का नाम सुनते ही मैंने सोचा कि इस शहर में दुनिया के सबसे ख़तरनाक व्यक्ति कैसे रह सकते हैं क्योंकि यह शहर सेना का बड़ा केंद्र हैं और काफ़ी संवेदनशील है.

ऐबटाबाद ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह का एक ज़िला है जो पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर है.

मैं करीब दो घंटे बाद ऐबटाबाद पहुँचा और पूछने पर पता चला ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए इस शहर के बिलाल टाउन इलाक़े में अभियान किया गया.

यह ऐबटाबाद का काफ़ी संवेदनशील इलाक़ा है क्योंकि वहाँ पाकिस्तानी मिलिट्री एकेडेमी है और जिस घर में अभियान किया वह इस एकेडेमी के मुख्य द्वार से मात्र चार सौ मीटर की दूरी पर है.

कुछ ही दूरी पर

जी हां मात्र चार सौ मीटर की दूरी पर ...मानो मिलिट्री की नाक के नीचे रह रहे हों ओसामा बिन लादेन.

यहां के कई लोगों को अभी भी यक़ीन नहीं होता कि मिलिट्री एकेडेमी के इतने पास दुनिया का सबसे बड़ा चरमपंथी कैसे रह रहा था.

आस पास नज़र दौड़ाई तो देखा कि ये एक तरफ पहाड़ों से घिरा है और यहां बमुश्किल 25-30 घर होंगे. छोटे बड़े.

सबसे बड़ी इमारत तो पाकिस्तानी मिलिट्री एकेडेमी की ही थी. फिर खेत खलिहान हैं लोगों के.

तभी याद आया कि इसी एकेडेमी पर एक बार आत्मघाती हमला भी हो चुका है जिसमें कुछ अधिकारियों की मौत भी हो चुकी थी. यानी सुरक्षा चाक चौबंद होनी चाहिए.

एकेडेमी और उसके आस पास की भी. ख़ैर इसी इमारत से कुछ दूर अमरीकी सेना की कार्रवाई हुई और लादेन को मार दिया गया.

ऐबटाबाद शहर में कोई ख़ास सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और यह नहीं लगा कि इस शहर में दुनिया की सबसे बड़ी घटना हुई है.

हां बिलाल टाउन यानी जिस इलाक़े में हमला हुआ था वहां सुरक्षा कड़ी हो चुकी थी.

सेना की घेराबंदी

सेना ने इलाक़े के घेर लिया था और किसी वाहन को इलाक़े में प्रवेश नहीं करने दे रहे थे.

मैं गाड़ी से उतर कर आगे की ओर बढ़ने लगा और उस घर के पास जाने की कोशिश की तो सेना के सुरक्षाबलों ने वहाँ जाने से रोक दिया.

मुझ से पहले कुछ पत्रकारों ने वहाँ जाने की कोशिश की लेकिन सैनिकों ने उन के कैमरे भी तोड़ दिए.

लगता था सैनिक पत्रकारों से नाराज़ थे. मैं उल्टे पाँव हो लिया रिपोर्ट फाइल करने के लिए लेकिन दिमाग बार बार सोचता रहा मिलिट्री एकेडेमी और ओसामा...मिलिट्री एकेडेमी और ओसामा.

ओसामा के बारे में तो बहुत जानते होंगे. पाकिस्तान की इस एकेडेमी के बारे में बताता चलूं.

पाकिस्तान की आज़ादी के बाद अक्तूबर 1947 में ऐबटाबाद में पाकिस्तान मिलिट्री एकेडेमी की स्थापना की गई. जिसका काम पाकिस्तानी सेना के लिए अधिकारी तैयार करना था. इसका काम ब्रिटेन के सैंडहर्स्ट जैसा ही माना जाता है जो सेना के अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग देता है.

एकेडेमी में तीन ट्रेनिंग बटालियन और 12 कंपनियां हैं. पीएमए की ट्रेनिंग दुनिया भर में अपना एक मुकाम रखती है तभी दुनिया के 34 से अधिक देशों के कैडेट ट्रेनिंग के लिए यहां आते हैं.

हर साल करीब 1500 कैडेटों को यहां ट्रेनिंग मिलती है.

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