'कमांडो को बल प्रयोग की अनुमति थी'

  • 11 मई 2011
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राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ओसामा बिन लादेन को खोजने के अभियान में इस बात पर ज़ोर दिया था कि अमरीकी कमांडो टीम इतनी बड़ी होनी चाहिए कि यदि उसे पाकिस्तान की ओर से विरोध का सामना करने पड़े तो वह बल प्रयोग कर घटनास्थल से वापस आने में सक्षम हो.

अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है.

कुछ सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से छापी गई इस रिपोर्ट में इन अधिकारियों के नाम नहीं लिए गए हैं लेकिन बताया गया है कि अभियान से कुछ ही दिन पहले इसी कारण से कमांडो टीम की संख्या बढ़ा दी गई थी.

इन जानकारियों से ये पता चलता है कि अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पकड़ने या मारने के लिए अमरीका किस हद तक जाने को तैयार था.

'बल प्रयोग का अधिकार हो'

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, "आदेश यह थे कि यदि संभव हो तो टकराव की स्थिति से बचा जाए. लेकिन यदि घटनास्थल से बाहर निकलने के लिए बल प्रयोग ज़रूरी हो तो कमांडो को ऐसा करने का अधिकार हो."

मूल योजना के अनुसार दो हेलिकॉप्टर अफ़ग़ानिस्तान की सीमा में तैयारी की स्थिति में मौजूद रहने थे ताकि यदि मदद की ज़रूरत हो तो वे सहायता कर सकें. उन्हें ओसामा बिन लादेन के घर तक पहुँचने में लगभग 90 मिनट लगते.

लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमरीकी अभियान से दस दिन पहले राष्ट्रपति ओबामा ने पूरी योजना का पुनर्निरीक्षण किया और फ़ैसला किया कि जो और हेलिकॉप्टर भेजे जाएँ जिनमें अतिरिक्त सैनिक हों जो अभियान को अंजाम दे रही टीम के पीछे-पीछे जाएँ.

बिन नाम लिए ओबामा प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से अख़बार लिखता है, "कई लोगों का मानना है कि यदि हम कहीं फँस जाते तो हम बातचीत कर अपना रास्ता बना सकते थे. लेकिन इस समय पाकिस्तान के साथ रिश्तों में आए तनाव को देखते हुए राष्ट्रपति किसी तरह का ख़तरा मोल नहीं लेना चाहते थे. वे चाहते थे कि यदि ज़रूरत हो तो अतिरिक्त सैनिक उपलब्ध होने चाहिए."

अमरीकी टीम को आदेश दिए गए थे कि पाकिस्तानी सेना के साथ टकराव न हो, लेकिन यदि ऐसा लगे कि टकराव होने जा रहा है तो योजना थी कि वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी उन पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क साधें जिससे टकराव टल जाए.

दुनिया में अल क़ायदा की मौजूदगी नीचे दिए गए नक्शे के ज़रिए देखें:

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