पाक में ओसामा समर्थकों की धर-पकड़

  • 18 मई 2011
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Image caption ख़ुफ़िया एजेंसियों ने चमरपंथियों के गिरफ्तारी केलिए कार्रवाई शुरु कर दी है.

पाकिस्तानी सेना की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद उनके संगठन के समर्थकों की तलाश के लिए व्यापक स्तर पर अभियान शुरू किया है.

इस अभियान में असैनिक ख़ुफ़िया एजेंसियों और पुलिस की स्पेशल ब्रांच को भी शामिल नहीं किया गया है.

ख़ुफ़िया एजेंसियों के अधिकारियों ने कुछ दिन पहले इस्लामाबाद, रावलपिंडी, अटक और झलम में इस्लामी मदरसों पर छापे मारे और छात्रों के रिकॉर्ड्स की जाँच की.

सैन्य सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने पुलिस की ओर से तैयार की गई मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों की रिपोर्ट को भी हासिल कर लिया है और उसका आकलन किया जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार ख़ुफ़िया एजेंसियों के अधिकारियों ने अपना पूरा ध्यान अटक और उसके क़रीबी इलाक़ों पर केंद्रित किया हुआ है और इन इलाक़ों में अभियान जारी है लेकिन अभी कोई ख़ास प्रगति नहीं हुई है.

इससे पहले भी सेना की ख़ुफ़िया एजेंसियाँ किसी संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ़्तारी के लिए विभिन्न इलाक़ों में छापे मारते रहे हैं और इलाक़े की पुलिस को सूचित किया जाता था. लेकिन इस बार स्थानीय पुलिस को भी पता नहीं है.

'पुलिस बेख़बर'

इस्लामाबाद और रावलपिंडी के पुलिस अधिकारी इस अभियान से बेख़बर हैं.

इस्लामाबाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बिन यामीन ने बीबीसी को बताया कि पुलिस की स्पेशल ब्रांच और आतंकवाद निरोधक दल के अधिकारी शहर के विभिन्न इलाक़ों में अभियान कर रहे हैं लेकिन उन्हें सेना के ख़ुफ़िया एजेंसियों के अभियान की कोई जानकारी नहीं है.

रावलपिंडी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी यासीन फ़ारूक़ का कहना है कि पिछले एक हफ़्ते के दौरान शहर के विभिन्न इलाक़ों में अभियान कर 30 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई में आईएसआई और सेना की दूसरी ख़ुफ़िया एजेंसियाँ शामिल नहीं थी.

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