'गोलियाँ कान के पास से निकल रही थीं'

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Image caption कराची के फ़ौजी ठिकाने पर एक महीने में ये तीसरा हमला है.

जब मैं हमला शुरू होने के आधा घंटे बाद मेहरान एयर बेस पहुँचा तो हर तरफ़ गहरा काला धुँआ छाया हुआ था.

ठिकाने के बाहर सायरन बजाते एंबुलेंस मौजूद थे और हमले के शुरू होने के बाद चारों तरफ़ कड़ी नाकेबंदी शुरू कर दी गई थी.

हमले की ख़बर मिलते ही भारी तादाद में पत्रकार वहाँ पुहँच गए थे. टीवी चैनलों के सैटलाइटों से लैस दर्जनों ट्रकों ने भी वहाँ भीड़ लगा रखी थी.

हमला रात रविवार शाम साढ़े दस से ग्यारह बजे के बीच शुरू हुआ जब कुछ बंदूक़धारी पाकिस्तानी नौसेना के मेहरान हवाई ठिकाने में घुस गए.

घटना में सोमवार की सुबह तक 11 लोगों के मारे जा चुके हैं जबकि हमलावरों ने चीनी फ़ौज के अधिकारियों समेत कुछ लोगों को बंधक बना लिया है.

फ़ौजी ठिकाना कराची की मुख्य सड़क - शाहराह-ए-फैसल के बाज़ू में है और बहुत सारे तमाशबीन भी ये जानने की कोशिश कर रहे थे कि आख़िर माजरा क्या है?

दूर, ठिकाने की ऊँची दीवारों के परे आग की ऊँची लपटें साफ़ दिखाई दे रही थीं.

पहले तो दोनों और से रह-रहकर गोलीबारी हो रही थी लेकिन मेरे पहुँचने के पंद्रह मिनट के बाद जो फ़ायरिंग शुरु हुई वो कुछ देर तक चली.

इसी बीच कई गोलियां मेरे कानों के पास से सनसनाती हुई निकल गईं और हम सब जान की सलामती के लिए ज़मीन पर पेट के बल लेट गए.

कुछ ने सर पर हाथ भी रख लिए थे.

कुछ घंटों बाद जब मैं वहाँ से वापस जा रहा था तो ठिकाने के भीतर मौजूद जवानों की मदद के लिए बख़्तरबंद गाड़ियाँ लिए फ़ौजी दस्ते पहुँच रहे थे.

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