कराची में नौसेना हमले का मुक़दमा दर्ज

  • 24 मई 2011
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Image caption कराची हमले में मारे गए नौसेना के लैफ्टीनेंट यासिर अब्बास के परिजन

पाकिस्तानी पुलिस ने कराची में नौसेना के ठिकाने पर हुए हमले का मुक़दमा दर्ज कर लिया है और नौसेना के अधिकारियों ने हमले की जाँच शुरु कर दी है.

नौसेना के प्रवक्ता इरफ़ानुल हक़ ने बीबीसी को बताया कि नौसेना प्रमुख ने जिस जाँच दल के गठन के आदेश दिए थे उसने जाँच शुरु कर दी है.

उन्होंने कहा कि जाँच करने वालों में नौसेना, संघीय जाँच एजेंसी, वायुसेना, अर्थसैनिकबल और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

दूसरी ओर प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने नौसेना के ठिकाने मेहरान का दौरा किया और बाद में हमले में घायल होने वाले सुरक्षाकर्मियों से मुलाक़ात की.

उन्होंने पत्रकारों ने बातचीत करते हुए कहा कि पाकिस्तानियों को आतंकवादी कार्रवाईयों से डराया नहीं जा सकता और वे सब आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक जुट हैं.

'चरमपंथियों की संख्या पर विवाद'

दूसरी तरफ पाकिस्तानी नौसेना के प्रमुख एडमिरल नुमान बशीर ने उन आरोपों का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि सुरक्षा में हुई चूक के कारण चरमपंथियों को बेस में प्रवेश होने का अवसर मिला.

नौसेना के ठिकाने पर हुए हमले को लेकर चरमपंथियों की संख्या पर नौसेना और गृहमंत्री के बयान एक दूसरे से अलग हैं.

गृहमंत्री रहमान मलिक ने हमलावरों की संख्या छह बताई थी लेकिन नौसेना के अधिकारी इरफ़ान असग़न ने हमले का मुक़दमा दर्ज करते समय पुलिस को बताया कि 10 से 12 चरमपंथी नौसेना के ठिकाने मेहरान में दाख़िल हुए और हमला कर दिया.

पाकिस्तानी नौसेना ने उन ख़बरों को भी रद्द कर दिया कि हमलावरों ने मुक़ाबले के दौरान नौसेना के हथियार इस्तेमाल किए. नौसेना के अनुसार चरमपंथियों ने रुसी हथियार इस्तेमाल किए जो वह इस्तेमाल नहीं करते.

'मृतकों को दफ़नाया गया'

दूसरी ओर नौसेना के ठिकाने पर चरमपंथियों के ख़िलाफ़ हुए अभियान में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के शव लाहौर, नारोवाल, हरीपुर और मुल्तान पहुँचा दिए गए जहाँ उन को दफ़नाया गया.

नौसेना के ठिकाने पर हुए हमले में चरमपंथियों की गोलियों का निशाना बने लेफ़्टीनेंट यासिर अब्बास को लाहौर में सरकारी सम्मान के साथ दफ़नाया गया.

उनकी नमाज़े जनाज़ा में पंजाब के गवर्नर लतीफ़ खोसा सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों और सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया.

24 वर्षीय यासिर अब्बास तीन बहनों के अकेले भाई थे और चार महीने बाद उन की शादी होने वाली थी.

यासिर अब्बास के एक रिश्तेदार अदनान हमदानी ने बीबीसी को बताया कि नौसेना के ठिकाने पर हुए पहले धमाके की आवाज़ उ की माता ने यासिर के फ़ोन पर सुनी थी और जब वे घायल हुए तो उन के घर वालों को पता चल चुका था.

ग़ौरतलब है कि जब नौसेना के ठिकाने पर हमला हुआ तो यासिर अब्बास बेस के हिस्से में तैनात थे.

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