पाक भारत को लेकर संवेदनशीलः मुशर्रफ़

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Image caption लंदन में निर्वासन का जीवन बिता रहे परवेज़ मुशर्रफ़ पाकिस्तान लौटना चाहते हैं

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा था कि पाकिस्तान ने भारत को हौव्वा बना लिया है जो उसकी ग़लती है.

बराक ओबामा की ब्रिटेन यात्रा के दौरान बीबीसी ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से विशेष बातचीत की. परवेज़ मुशर्रफ़ निर्वासन के दिन लंदन में ही गुज़ार रहे हैं.

बीबीसी-2 के समाचार कार्यक्रम 'न्यूज़नाइट' के प्रेज़ेंटर जेरेमी पैक्समैन से परवेज़ मुशर्रफ़ की बातचीत के मुख्य अंश.

आप जिस मिलिट्री एकेडमी से ट्रेनिंग लेकर निकले हैं उसके बिल्कुल पड़ोस में ओसामा बिन लादेन का वर्षों तक रहना, क्या आपको चौंकाता नहीं है?

हाँ, बाक़ी लोगों की ही तरह मैं भी चकित हुआ हूँ और मुझे धक्का भी लगा है. मैं इस बात से सहमत हूँ कि यह साबित करना बहुत मुश्किल होगा कि लोगों की मिलीभगत नहीं थी.

अमरीकी कहते हैं कि ओसामा पाँच साल पहले वहाँ पहुँचे, वह आपका कार्यकाल था, आप कह रहे हैं कि आपको पता नहीं था, किसी को तो पता था?

मैं तो यही कह सकता हूँ कि मुझे पता नहीं था, पाँच साल वाली बात मेरे गले नहीं उतरती, अमरीकी अगर किसी ठोस सबूत के साथ यह बात कहें तो अलग बात है, यह बात मैं सपने में भी नहीं सोच सकता कि ख़ुफ़िया एजेंसी के लोग इसमें शामिल थे और मुझे इसकी ख़बर तक नहीं थी, मैं यह कह सकता हूँ कि रणनीतिक स्तर पर ओसामा को छिपाने का निर्णय नहीं लिया गया था और इसकी जानकारी मुझे नहीं थी. फिर लगता है कि ये हो सकता है कि यह काम निचले स्तर के किसी व्यक्ति ने किया होगा, लेकिन यह बात भी समझ में नहीं आती क्योंकि निचले स्तर के कमांडिंग लेवल के अधिकारी पाँच-छह साल में कम से कम तीन बार बदले होंगे. हम हर दो साल और अधिक से अधिक तीन साल पर इन ख़ुफिया अधिकारियों का तबादला करते रहते हैं, तो क्या तीन अलग-अलग अधिकारी ओसामा को वहाँ छिपाए हुए थे, मुझे नहीं लगता. हम ह्यूमन इंटेलिजेंस पर भरोसा करते हैं, वहाँ हज़ारों लोगों की नज़र गई होगी, किसी को पता नहीं चला, ये बड़ी अजीब बात है, मैं इसे लापरवाही, बेवकूफ़ी या अयोग्यता कह सकता हूँ, यह पक्के तौर पर नाकामी है.

यह भ्रष्टाचार का मामला नहीं था?

नहीं.

आप जब राष्ट्रपति थे क्या आपको आईएसआई पर पूरा भरोसा था?

रणनीतिक स्तर पर पूर्ण विश्वास था, बिल्कुल पक्का विश्वास.

यह मामला पश्चिमी देशों के लिए बहुत अहम है, वे पाकिस्तान को इतना पैसा दे रहे हैं आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में उसके पूरे सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं...

पाकिस्तान की भी कुछ उम्मीदें हैं, पाकिस्तान चाहता है कि उसकी आकांक्षाओं और संवेदनाओं का खयाल रखा जाए, हमारी संवदेनशीलता परमाणु क्षमता से जुड़ी है, हम भारत को लेकर संवेदनशील हैं. भारत के समर्थन में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पक्षपातपूर्ण रवैया न पाकिस्तान की जनता को अच्छा लगता है, न पाकिस्तान की सरकार को.

अमरीका पाकिस्तान को अच्छी-ख़ासी आर्थिक सहायता दे रहा है, ब्रिटेन हर साल औसतन 35 करोड़ पाउंड की सहायता दे रहा है, हम आख़िर पाकिस्तान को मदद क्यों दें?

इसमें कुछ आर्थिक सहायता है, कुछ कर्ज़ है इसलिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए, देखिए ऐसा क्यों है कि पाकिस्तान में लोग अमरीका से इतना नाराज़ रहते हैं, उसकी वजह ये है कि वे हमेशा एकतरफ़ा रुख़ रखते हैं. आपको पता है कि हाल ही में हमने, दो महीने पहले ही, पाँच ट्रक पकड़े जिन पर राकेट लान्चर और मोर्टार लदे हुए थे, ये ट्रक किसने भेजे थे? अमरीकी सरकार ने? अफ़ग़ान सरकार ने? नहीं साहब, यह भारत का काम था, हमें ये बात पता है.

भारत के साथ आपकी समस्या है, हमारी भारत से कोई समस्या नहीं है, मैं आपसे फिर पूछता हूँ कि आख़िर इतनी बड़ी रकम पाकिस्तान पर पश्चिमी देश क्यों ख़र्च करें?

क्योंकि हम आंतकवाद के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं.

ये ब्लैकमेल की तरह सुनाई देता है कि अगर आप हमारी मदद नहीं करेंगे तो पता नहीं इसका नतीजा क्या होगा?

ये बात बिल्कुल सही है मगर यह ब्लैकमेल नहीं है. मेरा ख्याल है कि पाकिस्तान की जनता को समझना चाहिए कि यह लड़ाई हम अमरीका के लिए नहीं लड़ रहे हैं, समस्या दोनों ओर है, पाकिस्तानी जनता को समझना चाहिए कि यह उनकी लड़ाई भी है. मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि पाकिस्तान की अधिकतर जनता देश का तालिबानीकरण नहीं चाहती इसलिए हमें तालिबान और अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई जीतनी होगी. इसी तरह अमरीका को भी समझना चाहिए कि अगर वे पाकिस्तान को बिल्कुल बेबस कर देंगे तो पूरे क्षेत्र में और दुनिया में जो कुछ होगा वह आज की स्थिति से कहीं ज्यादा गंभीर होगा.

क्या आप पाकिस्तान जाकर दोबारा राष्ट्रपति बनना चाहते हैं?

राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री पता नहीं, उसके बारे में मैं नहीं सोच रहा लेकिन मैं पाकिस्तान जाकर चुनाव लड़ना चाहता हूँ और जीतना चाहता हूँ.

लेकिन पाकिस्तान जाते ही आपको गिरफ़्तार नहीं कर लिया जाएगा?

नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता, अगर ऐसा होगा भी तो मैं क़ानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हूँ, उनके आरोपों में कोई दम नहीं है.

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