पाक को क्यों नहीं है ‘कार्रवाई’ की जल्दी

  • 8 जून 2011
पाक सेना
Image caption पाक सेना ने इस इलाके में 34,000 से ज़्यादा सैन्य दल तैनात किए हैं.

पाकिस्तान के उत्तरी वज़ीरिस्तान इलाके में आराजकता का माहौल पसरा है और स्थानीय ही नहीं कई विदेशी चरमपंथी गुटों भी गढ़ है.

अमरीका की ओर से भले ही पाकिस्तान पर लगातार इस इलाके में कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा हो लेकिन पाकिस्तान इस कथित ‘आतंकवाद के गढ़’ को निशाना बनाने से बचता रहा है.

इस इलाके में अल-क़ायदा और पाकिस्तानी तालीबान का खतरनाक गठजोड़ काम करता है. साथ ही इस इलाके में सक्रीय हक्कानी समूह के कई चरमपंथियों ने अमरीका और नेटो सेनाओं पर कई घातक हमले किए हैं.

अमरीका कहता रहा है कि ये इलाका ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद का गढ़ है’ लेकिन पाकिस्तान का कहना है यह इलाका ‘पूरी तरह शांत और स्थिर है’.

बीबीसी संवाददाता ओरला गुएरिन के मुताबिक पाकिस्तान और उसकी सेना के वरिष्ठ कमांडर इस इलाके में कोई भी बड़ी कार्रवाई करने की जल्दी में नहीं हैं.

बीबीसी से हुई बातचीत में लेफ़टिनेंट जनरल आसिफ़ यासीन मलिक ने साफ़तौर पर कहा, '' फिलहाल हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है. मुझे नहीं लगता कि अगले कुछ दिनों या हफ़्तों में इस तरह की कोई कार्रवाई होने की संभावना है.''

'कार्रवाई पाक हित में हो'

जनरल आसिफ़ यासीन मलिक का कहना है कि उन पर कोई दबाव नहीं है और ‘जब सेना की मर्ज़ी होगी वह तभी हमले करेगी.’ उन्होंने कहा कि, ‘ऐसी कोई भी कार्रवाई तभी की जाएगी वो पाकिस्तान के हित में हो.’

मसला ये है कि पाकिस्तान का राष्ट्र हित अमरीका के हित से अलग है.

ओरला गुएरिन के मुताबिक अमरीका के लिए जहां हक्क़ानी जैसे समूहों पर कार्रवाई ज़रूरी है वहीं माना जाता है कि पाकिस्तान की खुफ़िया ऐजेंसी आईएसआई हक्क़ानी के संस्थापकों को शरण दे रही है.

'सेना को है ख़तरे का अंदेशा'

राजनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान का मानना है कि हक्क़ानी जैसे संगठन अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सेनाओं के बाहर जाने के बाद इस इलाके में पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

यही वजह है कि इस इलाके में भले ही पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई के धमाकों की गूंज अक्सर सुनाई पड़ती है. लेकिन सेना के निशाने पर पाकिस्तान में हमला करने वाले चरमपंथी समूह हैं न कि अफ़ग़ानिस्तान को निशाना बनाने वाले हक्कानी जैसे समूह.

साथ ही पाक सेना ने इस इलाके में 34,000 से ज़्यादा सैन्य दल तैनात किए हैं लेकिन सेना किसी बड़ी कार्रवाई को करने की मंशा नहीं रखती.

यहां तक की पाकिस्तान के सामरिक मामलों के जानकार नजम रफ़ीक का कहना है कि हाल में हुए घटनाक्रम के बाद अगर पाकिस्तान अमरीका को पुष्ट करने के मकसद से इस इलाके में कोई बड़ी कार्रवाई करता है तो वह बेहद ख़तरनाक होगा.

रफ़ीक का कहना है कि पाकिस्तानी सेना जानती है कि इलाके में मौजूद गुट ऐसे हमले की स्थिति में बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं.

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