ओसामा की सूचना देने वाले पाँच गिरफ़्तार

ओसामा बिन लादेन का घर

ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के एजेंटों के ख़िलाफ़ व्यापक अभियान शुरु कर दिया है.

अमरीकी मीडिया की ख़बरों के मुताबिक़ ओसामा बिन लादेन के बारे में जानकारी देने और अमरीकी अभियान में मदद पहुँचाने के आरोप में पाँच संदिग्ध मुख़बिरों को गिरफ़्तार किया गया है.

एक सैन्य अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि सीआईए के कई लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है, जिसमें ज़्यादातर पाकिस्तानी नागरिक हैं.

लाहौर में इसी साल जनवरी में सीआईए के एक अधिकारी रेमंड डेविस ने फ़ायरिंग कर दो पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या कर दी थी जिसके बाद पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने सीआईए के एजेंटों की निशानदेही करना शुरु कर दिया था.

उल्लेखनीय है कि इस्लामाबाद से कुछ दूरी पर स्थित ऐबटाबाद में एक और दो मई की दरम्यानी रात अमरीकी सेना ने एक कार्रवाई में अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

इसके बाद अमरीका ने कहा था कि पाकिस्तान के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के नज़दीक स्थित इस घर में ओसामा बिन लादेन पिछले पाँच साल से रह रहे थे.

दो मई के बाद

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Image caption ओसामा बिन लादेन को मारने के बाद अमरीकी सैनिक उनका शव अपने साथ ले गए थे

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक़ उन पाकिस्तानी और अमरीकी नागरिकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की शुरुआत दो मई को ऐबटाबाद में हुई अमरीकी कार्रवाई के बाद हुई है.

अमरीकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक ख़बर में कहा है कि सीआईए के प्रमुख लियोन पैनेटा ने पिछले सप्ताह पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष और आईएसआई के प्रमुख के साथ हुई मुलाक़ात में पाकिस्तान में सीआईए के एजेंटों की गिरफ़्तारी पर आपत्ति जताई थी.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ की गई अमरीकी कार्रवाई में मदद देने वालों में पाकिस्तानी सेना का एक मेजर भी शामिल था जो अब पाकिस्तानी सेना के हिरासत में है.

अख़बार का कहना है कि पांच लोग पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई की गिरफ़्त में हैं, जिनमे वो व्यक्ति भी शामिल है जिसका ऐबटाबाद में लादेन के परिसर के पास मकान था.

कहा जा रहा है कि इसने इस मकान को सीआईए के लोगों को निगरानी रखने के लिए किराए पर दिया था.

'व्यापक स्तर पर कार्रवाई'

अमरीकी मीडिया का कहना है कि गिरफ़्तार किए गए लोगों में पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी भी हैं.

लेकिन पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर अज़मत अब्बास ने इस बात का खंडन किया कि ओसामा के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई के लिए मदद देने वालों में सेना का कोई व्यक्ति था.

हालांकि उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि सीआईए को मदद देने के आरोप में देश भर से कई लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनसे जाँच हो रही है.

उन्होंने कहा, “कोई पाकिस्तानी फ़ौजी इस संबंध में हिरासत में नहीं है लेकिन कुछ लोगों को हम ने जाँच के लिए हिरासत में रखा है जिनके बारे में हमें संदेह है कि ये लोग अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए काम करते थे.”

उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने ओसोमा बिन लादेन के घर के पास ही एक दूसरे घर पर छापा मार कर वहाँ से कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया है जिनके बारे में बताया जा रहा है कि वह भी सीआईए के लिए काम करते थे.

ब्रिगेडियर अज़मत अब्बास के मुताबिक़ कुछ दूसरे लोगों को भी गिरफ़्तार किया गया है जो ओसामा बिन लादेन के घर में जाते थे.

कार्रवाई में मदद करने वाले भी

एक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ अमरीकी कार्रवाई में मदद देने के आरोप में भी कुछ लोगों को हिरासत में लिया है.

Image caption अमरीकी मीडिया के अनुसार सीआईए प्रमुख लियोन पैनेटा ने इन कार्रवाइयों पर आपत्ति जताई है

उनके मुताबिक़ उनमें से दो तरह के लोग शामिल हैं.

एक वह गुट है जिसने अमरीकी हैलीकॉप्टरों को घर को पहचानने में मदद की थी और दूसरा वह गुट है जिसने पाकिस्तानी सीमा के अंदर हैलीकॉप्टरों को ईँधन दिया था.

सैन्य सूत्रों ने बताया है कि देश भर में अमरीकी एजेंटों के ख़िलाफ़ हो रही कार्रवाई में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों के कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की गई है.

ग़ौरतलब है कि दो मई ऐबटाबादा में अल क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ हुई अमरीकी कार्रवाई के बाद से पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई और अमरीकी सीआईए के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि कोई है जो बिन लादेन को संरक्षण दे रहा था.

हालांकि पाकिस्तान ने इस बात का हमेशा खंडन किया है कि वो ओसामा बिन लादेन और उसकी मौजूदगी के बारे में जानता था.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने हाल के पाकिस्तान दौरे में कहा था कि ऐसे कोई भी प्रमाण नहीं मिले हैं जिनसे ये पता चलता हो कि पाकिस्तान सरकार के किसी भी उच्च अधिकारी को ओसामा की मौजूदगी के बारे में पता हो.

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