पाक प्रशासित कश्मीर में विधान सभा चुनाव

  • 26 जून 2011
जेकेएलएफ़
Image caption कश्मीर की आज़ादी की मांग करनेवाली संस्थाएं चुनाव का बहिष्कार कर रही हैं.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में विधान सभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा है.

हालांकि 49 सदस्यों वाली विधान सभा चुनाव में कोई 22 राजनीतिक दलों के 421 उम्मीदवार हिस्सा ले रहे हैं लेकिन पूरे कश्मीर के लिए संघर्षरत संगठनों को या तो इसमें शामिल होने की इज़ाज़त नहीं दी गई है, या पूरे कश्मीर सूबे की आज़ादी की मांग करनेवाले कुछ तंज़ीमों जैसे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने चुनाव का बहिष्कार किया है.

पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर के चुनाव हमेशा से सवालों के दायरे में रहे हैं.

हलफ़नामा

जहाँ कश्मीर के पाकिस्तान के साथ विलय की हामी राजनीतिक दल क्षेत्र में करवाए जानेवाले चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं वहीं कश्मीर की पूरी आज़ादी की आवाज़ उठाने वाले संगठनों को इस बात पर एतराज़ है कि उन्हें चुनाव में हिस्सी लेने की आज्ञा ही नहीं है.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के चुनावी क़ानून के मुताबिक नामांकन दाख़िल करते समय उम्मीदवार को ये हलफ़नामा देना होता है कि वो कश्मीर का पाकिस्तान के साथ विलय का समर्थन करते हैं.

इस कारण से जेकेएलएफ़ जैसे दल - जो कश्मीर को भारत और पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र देश देखना चाहते हैं, चुनाव के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं कुछ दल जो इसमें हिस्सा लेना चाहते थे वो समय पर नामांकन ही दाख़िल नहीं कर पाए.

जेकेएलएफ स्टुडेंट्स विंग के पूर्व चेयरमैन राजा ग़ुलाम मुज्तबा का कहना है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में 'एलेक्शन नहीं सेलेक्श्न' होता है.

राजा ग़ुलाम मुज्तबा का कहना है, "जो भी आज़ादी पसंद पार्टियाँ हैं उन्हें चुनाव लड़ने की इजाज़त नहीं है. उनसे कहा जाता है कि आप पाकिस्तान की प्रभुसत्ता को माने. कुछ आज़ादी पसंद पार्टियों ने ये मानते हुए चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लिया, लेकिन यहाँ की सरकार ने मीडिया को अपने कब्जे़ में ले लिया है जिसके कारण उन दलों की उनकी ख़बरें ढूँढने से भी नहीं मिलती हैं. यहाँ पाकिस्तानी सरकार और खुफ़िया एजेंसियों का एकाधिकार है."

राजा मुज्तबा का कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बस इतना ही फ़र्क़ है कि एक ओर लोगों ने आज़ादी के लिए बंदूक़ें उठा रखी हैं जिन्हें भारत की सेना दबाती है लेकिन यहाँ लोगो के दिमाग़ पर भी सरकार ने पहरा बिठा रखा है.

स्वायत्तता

रविवार को हो रहे चुनावों में 200 से ज़्यादा आज़ाद उम्मीदवार भी मैदान में हैं. लेकिन असल मुक़ाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, मुस्लिम लीग (नवाज़) और जम्मू-कश्मीर मुस्लिम कांफ्रेंस के बीच है.

मुस्लिम लीग (नवाज़) पहली बार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के चुनावों में हिस्सा ले रही है.

Image caption चुनाव के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं.

चुनाव को शांतिपूर्ण ढ़ंग से करवाए जाने के लिए पुलिस और अर्ध-सैनिक बलों को मिलाकर कुल सोलह हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं.

विधान सभा में 12 सीटें ऐसी हैं जिनपर 1947 से पाकिस्तान में रह रहे भारतीय कश्मीर के शरणार्थियों को उम्मीदवार चुनने का अधिकार है. आठ सीटों का फ़ैसला चुने हुए उम्मीदवार बाद में करते हैं.

लेकिन आज सिर्फ़ 38 सीटों के लिए मत डाले जाएंगें.

अधिकारियों का कहना है कि कराची, बलुचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की तीन सीटों के लिए चुनाव वोटर लिस्ट में हुई गड़बड़ी के कारण फ़िलहाल नहीं करवाए जा रहे हैं.

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता जुल्फ़िक़ार अली का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान पहली बार स्थानीय हुकुमत और पाकिस्तान के रिश्तों और ख़ासतौर पर प्रांतीय ढ़ांचे की स्वायत्तता पर खुलकर चर्चा हुई.

हालांकि इसके साथ-साथ क्षेत्र में कुछ साल पहले आए भूकंप और पूनर्निमाण के कामों और कश्मीर समस्या के सवालों को भी राजनीतिक दलों ने उठाया.

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