भारत के लिए पाक के रवैए में बड़ा बदलाव

अहमद मुख़्तार
Image caption रक्षामंत्री के मुताबिक़ पाकिस्तान का भारत से लड़ना मुश्किल है.

मुंबई हमलों के बाद भारत के प्रति पाकिस्तानी सरकार के रवैये में काफ़ी बदलाव आया है और पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का ताज़ा बयान इसको दर्शाता है.

पाकिस्तान की प्रजातांत्रिक तरीक़े से चुनी गई सरकारों ने हमेशा भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने की कोशिश की है. दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ने की ज़्यादातर घटनाएं सैन्य शासन के दौरान हुई हैं.

रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख़्तार ने जिस तरह का इंटरव्यू बीबीसी को दिया है उससे स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की सरकार भी भारत के साथ अपने संबंध बेहतर करना चाहती है.

हालांकि पाकिस्तान में रक्षा मंत्री के पद का कोई ख़ास महत्व नहीं होता है लेकिन चौधरी अहमद मुख़्तार राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी के करीबी मित्र माने जाने हैं इसलिए उनके बयान को अनदेखा नहीं किया जा सकता.

उन्होंने साफ़ कहा है कि भारत ने अपनी सेना को जितना विकसित किया है और जिस तरह के आधुनिक हथियार हासिल कर लिए हैं, पाकिस्तान उसका मुक़ाबला नहीं कर सकता है.

'सेना को संदेश'

इस बयान का एक आंकलन तो ये हो सकता है कि पाकिस्तान की मौजूदा हुकुमत की नीति है - कि भारत के साथ संबंध को मज़बूत बनाया जाए.

दूसरा यह कि उन्होंने सेना को भी एक संदेश देने की कोशिश की है कि भारत से मैदान-ए-जंग में मुक़ाबला उतना आसान नहीं.

अब पाकिस्तानी सेना अपने रक्षा मंत्री के इस बयान को कितना महत्व देती है यह एक अलग विषय है.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से बहुत आगे है और दूसरा कि पिछले लगभग दस सालों के दौरान पाकिस्तानी सेना लगातार युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रही है भले ही ये आंतरिक युद्ध का ही मामला क्यों न हो.

सैना ने दक्षिण वज़ीरिस्तान और स्वात घाटी में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ व्यापक स्तर पर अभियान किए हैं. सेना अभी भी कुर्रम, बाजौड़ और दूसरे क़बायली इलाक़ों में मौजूद है और वहाँ चरमपंथियों से लड़ रही है.

सैन्य अधिकारियों के मुताबिक़ लगातार युद्ध जैसी स्थिति में रहने के कारण सेना आर्थिक रुप से कमज़ोर हो गई है.

रक्षा मंत्री के बयान को इन सब बातों को ज़हन में रखकर देखा जाना चाहिए.

'व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर'

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Image caption पिछले हफ़्ते भारत-पाकिस्तान के विदेश सचिवों ने कई अहम मुद्दों पर वार्ता की.

इसमें कोई शक़ नहीं है कि दोनों देश संबंधों को बेहतर करने की कोशिश में गंभीर नज़र आते हैं.

कुछ दिन पहले यहाँ इस्लामाबाद में दोनों देशों के विदेश सचिवों की बीच वार्ता हुई थी. जिस तरह से दोनों पक्षों ने संवेदनशील मुद्दों पर खुल कर बातचीत की वैसा पहले देखने में नहीं आया था.

दोनों ने परमाणु हथियारों की सुरक्षा और कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा की.

पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार अब भारत के साथ व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है.

पिछले महीने दोनों देशों के वणिज्य सचिव की बैठक हो चुकी है.

सोमवार को वाघा सीमा पर दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें इस बात पर विचार किया गया कि व्यापार के लिए वाघा पर एक अलग गेट खोला जाए ताकि लोगों की आवा-जाही से व्यापार में कोई बाधा न उत्पन्न हो.

इस तरह के क़दम से स्पष्ट होता है कि दोनों देश गंभीर रुप से सभी समस्याओं को हल करना चाहते हैं और वह भविष्य में युद्ध जैसी स्थिति से बचना चाहते हैं.

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