हत्या मामले में सुरक्षाबलों पर अभियोग

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Image caption सुरक्षाकर्मियों को कराची की अदालत में पेश किया गया.

पाकिस्तान की एक अदालत ने कराची में एक युवक की हत्या के आरोप में गिरफ़्तार सात सुरक्षाकर्मियों पर अभियोग लागू कर दिया है.

कराची की एक आतंकवाद निरोधक अदालत के जज बशीर अहमद खोसो के समक्ष अर्धसैनिक बल सिंध रेंजर्स के सुरक्षाकर्मियों बाहू रहमान, मंठार अली, लियाक़त अली, मोहम्मद तारिक़, शाहिद ज़फ़र, मोहम्मद अफ़ज़ल और अफ़सर ख़ान को पेश किया गया.

जज बशीर खोसो ने अभियुक्तों को अपना फ़ैसला पढ़ कर सुनाया और कहा कि 11 जून 2011 को कराची में सुरक्षाकर्मी शाहिद ज़फ़र ने युवा सरफ़राज़ शाह को फ़ाइरिंग कर क़त्ल कर दिया जो एक 'आतंकवादी' कार्रवाई है.

'आरोपों का खंडन'

अदालत के मुताबिक सुरक्षाबलों की गोलीबारी और युवा की हत्या से आम लोगों में डर पैदा हो गया है. सभी अभियुक्तों ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है.

मुख्य अभियुक्त शाहिद ज़फ़र के वकील शौकत हयात ने अदालत को बताया कि अभियुक्त आतंकवादी नहीं हैं और उन्होंने जान बूझ कर गोलीबारी नहीं की थी.

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि संयुक्त जाँच दल की रिपोर्ट अभियुक्तों को दी जाए. इस पर जज बशीर अहमद खोसो ने कहा कि जब भी रिपोर्ट अदालत में पेश होगी तो उसकी प्रतियाँ अभियुक्तों को दी जाएगी.

सरकारी वकील मोहम्मद ख़ान बुरड़ो ने सुनवाई के बाद पत्रकारों को बताया कि गुरुवार को सरफ़राज़ शाह के भाई सालिक शाह को अदलात में पेश किया जाएगा. उनके मुताबिक़ इस मुक़दमे में कुल 46 गवाह हैं.

'युवा की दिन दहाड़े हत्या'

ग़ौरतलब है कि आठ जून को कराची में अर्धसैनिक बलों ने दिन दहाड़े एक युवक सरफ़राज़ शाह पर गोली चलाई थी जिसमें वे मारे गए थे.

Image caption सुरक्षाकर्मियों ने दिन दहाड़े युवा पर गोलियाँ चलाई थी.

एक सिंध टीवी चैनल 'आवाज़ न्यूज़' के कैमरामेन ने इस पूरे दृश्यों को अपने कैमरा में क़ैद कर लिया था.

आवाज़ न्यूज़ पर दिखाई गई फ़ुटेज के अनुसार एक व्यक्ति एक युवक को बालों से पकड़ कर पार्क के अंदर से लाता है और उसे सुरक्षाकर्मियों के हवाले करता है.

उसके बाद वो युवक दया की भीख माँगता दिखाई देता है लेकिन एक सुरक्षाकर्मी युवक को करीब से गोली मारता है जो उसकी टांग पर लगती है और वो गिर जाता है जिसके बाद उनकी मृत्यु हो जाती है.

घटना के कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने आप संज्ञान लिया था और मुक़दमे को आतंकवाद निरोधक अदालत में चलाने का आदेश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि इस मुक़दमे की सुनवाई प्रतिदिन की जाए और एक महीने के भीतर अदालत फ़ैसला सुनाए.

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