सीआईए की हिरासत में हुई दो मौतों की जाँच शुरु

अबू ग़रैब (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption इराक़ की अबू ग़रैब जैल पहले भी क़ैदियों से दुर्व्यवहार के लिए सुर्खियों में आ चुकी है

अमरीकी सरकार ने घोषणा की है कि ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की हिरासत में दो लोगों की मौत की आपराधिक जाँच शुरु हो गई है.

अमरीका के एटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने कहा दो मामलों में आपराधिक जाँच शुरु हो गई है, चाहे उन्होंने ये स्पष्ट नहीं किया है ये कौन से मामले हैं.

बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता का कहना है कि माना जा रहा है कि ये मामले अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 2002 की एक घटना और इराक़ में वर्ष 2003 में हुई एक घटना से संबंधित हैं.

अमरीकी मीडिया में आ रही रिपोर्टों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में नवंबर 2002 में सीआईए की एक जेल में गुल रहमान नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि इराक़ में वर्ष 2003 में अबू ग़रैब जेल में मानांदेल अल-जमादी नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी.

फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि सीआईए के कितने अफ़सरों या फिर अन्य लोगों के ख़िलाफ़ जाँच होगी.

एरिक होल्डर ने कहा है कि अमरीका में ग्यारह सितंबर 2001 को हुए हमलों को बाद से 101 अन्य मामलों जाँच तो होगी लेकिन उनमें मुकदमा नहीं चलाया जाएगा.

तीन साल पहले शुरु हुई जाँच

तीन साल पहले एटॉर्नी जनरल रहे माइकल मुकासी ने न्याय मंत्रालय के वकील जॉन डर्हम से सीआईए की क़ैदियों से पूछताछ के वीडियो नष्ट किए जाने की रिपोर्टों की जाँच करने को कहा था.

इसके बाद अगस्त 2009 में होल्डर ने इस जाँच का दायरा बढ़ाकर सीआईए की हिरासत में क़ैदियों से दुर्व्यवहार के आरोपों को भी इसमें शामिल करने का आदेश दिया था.

सीआईए के अधिकारी रहमान को अफ़ग़ान तालिबान और अल क़ाय़दा के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करने वाला मानते हैं.

अधिकारियों ने समाचार एजेंसियों को बताया है कि नवंबर 2002 में उत्तरी काबुल में सीआईए की एक जेल में उसकी तब मौत हो गई जब उसे जेल की एक ठंडी दीवार के साथ ज़ंजीरों से बांध दिया गया.

अल-जमादी अबू ग़रैब जेल में अमरीकी विशेष बलों के साथ लड़ाई में घायल होने के बाद पहुँचा था.

हेल्डर ने गुरुवार को एक बयान में कहा, "डर्हम और उनकी टीम ने क़ैदियों से संबंदित ख़ासी सारी जानकारी का आकलन किया. उन्होंने मुझे अपनी जाँच के नतीजों के बारे में बताया है. मैनें उनकी सिफ़ारिशें स्वीकार कर ली हैं कि इन दोनों व्यक्तियों की हिरासत में मौत की पूरी आपराधिक जाँच होनी चाहिए. ये जाँच चल रही है. मंत्रालय ने तय किया है कि अन्य मामलों की विस्तृत आपराधिक जाँच की ज़रूरत नहीं है."

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