ओसामा के परिजनों को बाहर न भेजने का निर्देश

ऐबटाबाद (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption लादेन ऐबटाबाद के इसी घर में वर्षों से रह रहे थे.

ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद बने जांच आयोग ने निर्देश दिया है कि लादेन के परिजनों को आयोग की इजाज़त के बिना पाकिस्तान के बाहर नहीं जाने दिया जाए.

ऐबटाबाद कमीशन ने ये निर्देश पाकिस्तानी गृह मंत्रालय और ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को दिए हैं.

पाकिस्तान के प्रांत ख़ैबर पख़्तूख़्वाह के शहर ऐबटाबाद में इसी साल दो मई को अमरीकी सैन्य कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन मारे गए थे. उनकी मौत के बाद उस पूरी घटनाक्रम की जांच के लिए पाकिस्तान सरकार ने एक उच्च स्तरीय जांच आयोग का गठन किया था.

हाल ही में पाकिस्तानी अधिकारियों ने ऐसे संकेत दिए थे कि वो ओसामा बिन लादेन की एक पत्नी को उनके मूल देश यमन भेजने को तैयार हैं.

अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है कि पाकिस्तान सरकार या शक्तिशाली सुरक्षा एजेंसी आयोग के इस निर्देश का पालन करेगी या नहीं.

निर्देश

दो मई की घटना के बाद लादेन की तीन पत्नियों और कई बच्चों को पाकिस्तान सरकार ने अपने हिरासत में ले लिया था और वे सभी अभी तक पाकिस्तान में ही रह रहें हैं.

जांच आयोग ने हर उस व्यक्ति को अपना बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है, जो दो मई को हुई घटना से संबंधित कोई भी जानकारी रखता हो.

आयोग ने यक़ीन दिलाया है कि किसी भी तरह की जानकारी देने वाले की पहचान को गुप्त रखा जाएगा और उन्हें हर तरह की क़ानूनी सुरक्षा दी जाएगी.

आयोग ने लोगों से 31 जुलाई तक सारी जानकारी पहुंचाने का निर्देश दिया है, जिसके बाद आयोग ख़ुद लोगों से संपर्क स्थापति करेगा.

मंगलवार को इस्लामाबाद में हुई आयोग की पहली बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज न्यायमूर्ति जावेद इक़बाल की अध्यक्षता में बने जांच आयोग ने तय किया है कि देश के उच्च स्तरीय सेना अधिकारी, नौकरशाह और राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को आयोग के सामने बुलाया जाएगा.

आयोग ने विश्वास दिलाया है कि आयोग की कार्रवाई निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर आयोग की कुछ कार्रवाई गुप्त भी रखी जा सकती है.

कार्रवाई

अधिकारियों के मुताबिक़ आयोग की पहली बैठक में ज़्यादातर सामान्य क़िस्म के काम किए गए और ऐबटाबाद की घटना से जुड़े मामले की जांच से संबंधित कोई काम नहीं हो सका.

इस आयोग के सदस्यों में पूर्व पुलिस अधिकारी अब्बास ख़ान, पूर्व राजनयिक अशरफ़ जहांगीर क़ाज़ी और सेना के रिटायर्ड लेफ़्टिनेंट जनरल नदीम अहमद शामिल हैं.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के आदेश पर बने इस आयोग को चार मुख्य बिंदुओं की जांच करनी है. पहला काम है ओसामा बिन लादेन की पाकिस्तान में मौजूदगी के बारे में सही जानकारी इकट्ठा करना.

दूसरा काम है उन स्थितियों का पता चलाना जिनमें अमरीका ने ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की.

तीसरा काम है उन कारणों का पता चलाना कि आख़िर ज़िम्मेदार सरकारी अधिकारियों ने अपना काम क्यों नहीं किया. चौथा और आख़िरी काम है इस सारे मामले में आयोग को अपना सुझाव देना.

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