'अफ़गान सीमा से सेना बुला लेंगे'

  • 13 जुलाई 2011
चौधरी अहमद मुख़्तार
Image caption रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर अमरीका ने सहायता रोकी तो पाकिस्तान अफ़गान सीमा से अपने सैनिक वापिस बुला लेगा.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख़्तार ने कहा है कि अगर अमरीका ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में पाकिस्तानी सेना को वित्तीय साहयता रोकी तो अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से सेना को वापस बुलाया जाएगा.

निजी टीवी चैनल 'एक्सप्रेस 24x7' को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हम ऐसे नहीं बैठेंगे, अगर हमारे लिए दिक़्क़तें बढ़ती हैं तो हम अपनी पूरी सेना को वापस बुलाएंगे.”

उन्होंने बताया कि अमरीका से जो रक़म पाकिस्तान को मिलेगी वो आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में इस्तेमाल होगी और पाकिस्तान उसे अपने लिए ख़र्च नहीं करता है.

'विवश होगा पाकिस्तान'

चौधरी अहमद मुख़्तार ने कहा कि अमरीका वित्तीय साहयता देने से इंकार करता है तो फिर पाकिस्तान पश्चिमी सीमाओं ने अपनी सेना को वापस बुलाने पर विवश होगा और पाकिस्तान लंबे समय तक पहाड़ी इलाक़ों में अपनी सेना को नहीं रख सकता है.

उनके मुताबिक़ पाकिस्तान के क़बाइली इलाक़ों में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात हैं और उन्हीं इलाक़ों में सुरक्षाबलों की 11 सौ चौकियां हैं जहां एक चौकी पर 15 से 20 सैनिक तैनात हैं.

दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना ने अपने संसाधनों पर आतंकवाद और चरमपंथ से निपटे का संकल्प लिया है.

सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह संकल्प लिया गया.

चरमपंथ से निपटे का संकल्प

सेना की ओर जारी एक बयान के मुताबिक़ जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने बैठक हो बताया कि क़बायली इलाक़े कुर्रम एजेंसी में चल रहे सैन्य अभियान का उद्देश्य इलाक़े को चरमपंथियों से मुक्त करवाना है.

ग़ौरतलब है कि कुठ दिन पहले अमरीका ने घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली 80 करोड़ डॉलर की सैनिक सहायता रोक रहा है.

पाकिस्तानी सेना ने उस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि अतंरराष्ट्रीय सहायता के बग़ैर भी वह आतंकवाद और चरमपंथ से निपटने में सक्षम है.

सेना प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने कहा था कि सेना चाहती है कि अमरीका से जो उसे सहायता मिल रही है, वह क़बायली इलाक़े के आर्थिक विकास पर ख़र्च की जानी चाहिए और सेना को इसकी ज़रूरत नहीं है.

उनके मुताबिक़ सेना ने स्वात घाटी और दक्षिण वज़ीरिस्तान में सैन्य अभियान बिना किसी अतंरराष्ट्रीय सहायता से किए हैं और इसलिए सेना आतंकवाद और चरमपंथ से निपटने में सक्षम है.

दो मई को ऐबटाबाद में अमरीकी सैनिकों ने कार्रवाई कर अल क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था. अमरीकी यह कार्रवाई पाकिस्तान को बिन जानकारी दिए की थी जिसपर पाकिस्तानी सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

उस घटना के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में काफ़ी तनाव हो गया है.

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