आईएसआई प्रमुख अमरीका के लिए रवाना

  • 13 जुलाई 2011
शुजा पाशा
Image caption अमरीका-पाक संबंधों में तनाव के बीच जनरल शुजा पाशा अमरीका चले गए हैं.

अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव के बीच पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख अहमद शुजा पाशा वॉशिंगटन रवाना हो गए हैं.

सेना की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक़ लैफ़्टीनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा ने अमरीका के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जेम्स मेटिस के साथ इस्लामाबाद में मुलाक़ात की और बाद में वे अमरीका चले गए.

ऐबटाबाद में दो मई को अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ हुई अमरीकी सैनिकों की कार्रवाई के बाद जनरल शुजा पाशा की यह पहली अमरीका यात्रा है.

अपनी यात्रा के दौरान वे अमरीका के वरिष्ठ सैन्य और गुप्तचर विभान के अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे. इस दौरान वो आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में सहयोग और 80 करोड़ डॉलर की सैनिक साहयता पर बातचीत होगी.

'सैनिक साहयता पर रोक'

ग़ौरतलब है कि कुछ दिन पहले अमरीका ने घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली 80 करोड़ डॉलर की सैनिक सहायता बंद कर रहा है.

पाकिस्तानी सेना ने उस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि अतंरराष्ट्रीय सहायता के बग़ैर भी वह आतंकवाद और चरमपंथ से निपटने में सक्षम है.

जानकार मानते हैं कि पाकिस्तानी सेना पिछले कई सालों से लगातार युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रही है और वह आर्थिक रुप से कमज़ोर भी हो गई है इसलिए लंबे समय तक युद्ध से लड़ने में सक्षम नहीं है.

जाने-माने विश्लेषक डॉक्टर हसन अकसरी रिज़वी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “पाकिस्तान के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह लंबे समय तक युद्ध लड़ सके.''

उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहा युद्ध जल्दी ख़त्म नहीं होगा और यह आने वाले दिनों में और बढ़ेगा इसलिए पाकिस्तानी सेना के पास इतने संसाधन नहीं हैं.

'संबंधों में तनाव'

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Image caption अमरीकी सैनिकों ने ऐबटाबाद में ओसामा को मार दिया था.

डॉक्टर हसन असकरी ने बताया कि सरकार और सेना की यह कोशिश है कि अमरीका से संबंध बहतर हों ताकि साहयता मिलती रहे और अमरीका भी यही चाहता है कि संबंध ख़राब न हों.

उन्होंने कहा, “अगर वह चाहें तो पूरी सैनिक साहयता बंद कर सकते थे इसलिए उन्होंने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने के लिए 80 करोड़ डॉलर की सहायता रोकने की घोषणा ही की है.”

दो मई को ऐबटाबाद में अमरीकी सैनिकों ने अपनी कार्रवाई में अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

अमरीका की यह कार्रवाई पाकिस्तान को बिना जानकारी दिए की गई थी जिस पर पाकिस्तान सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में काफ़ी तनाव हो गया है.

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