अब चीन ने की पाकिस्तान की तारीफ़

  • 4 अगस्त 2011
चीन-पाकिस्तान
Image caption पाकिस्तान चीन से अपने संबंधों को अतिमहत्वपूर्ण मानता है

चीन के शिज़्यांग प्रांत में सक्रिय चरमपंथियों के पाकिस्तान से आने की बात करने के कुछ ही दिन बाद चीन ने चरमपंथ के खिलाफ़ जंग में पाकिस्तान को अपना साथी बताते हुए पाकिस्तान की सराहना की है.

एक वक्तव्य में चीन के विदेश मंत्रलय ने कहा है कि पाकिस्तान चरमपंथ के खिलाफ़ कार्रवाई में चीन का एक मज़बूत साथी है. चीनी विदेश विभाग से जारी इस वक्तव्य में उस बयान का कोई जिक्र नहीं है जिसमे चीन के काश्गर क्षेत्र के अधिकारीयों ने चीन में सक्रीय वीगर चरमपंथियों के पाकिस्तान में प्रशिक्षण पाने की बात कही थी.

बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जीलानी के अनुसार ज़ाहिर तौर पर दोनों देशों के बीच रिश्तों के बारे में किसी भी तरह के कयास को दबाने के लिए जारी किए गए इस बयान में चीन ने पाकिस्तान के तारीफ़ करते हुए चरमपंथ के खिलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान की कामयाबियों की तारीफ़ की है और साथ ही इसके योगदान को महत्वपूर्ण बताया है.

सबसे बड़ा सहारा

पाकिस्तान को हमेशा यह शिकायत रहती है कि अमरीका चरमपंथ के खिलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान के योगदान की उतनी सराहना नहीं करता जितनी की जानी चाहिए.

जहाँ चीन और पकिस्तान के बीच चरमपंथ के खिलाफ़ सहयोग बढ़ता जा रहा है, वहीं इसी तरह की कार्रवाई में लगीं अमरीकी और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच संबंध तनावपूर्ण नज़र आ रहे हैं. पाकिस्तान और अमरीका के बीच तनाव में एबटाबाद में ओसामा के अमरीकी सैनिकों के मारे जाने के बाद लगातार बढ़ोत्तरी हुई है.

ऐसे समय में पाकिस्तान लगातार चीन की तरफ़ देख रहा है. बीबीसी संवाददाता जीलानी के अनुसार पाकिस्तान अमरीका के साथ अपने संबंधों को जटिल और अविश्वसनीय मानता है. पाकिस्तान ना केवल चीन को अमरीका के उत्तर के रूप में देखता है बल्कि उसे भारत की बढ़ती ताकत के परिपेक्ष्य में एक साथी भी मानता है.

पाकिस्तान के लिए चीन के साथ संबंध सबसे महत्वपूर्ण हैं.

शायद इसीलिए चीन द्वारा वीगर चरमपंथियों के पाकिस्तान में प्रशिक्षण की बात कहे जाने के बाद पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख अचानक चीन पहुँच गए. इस कदम को पाकिस्तान द्वारा चीन की शिकायतों को दूर करने का एक प्रयास माना जा रहा है.

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