कराची में जारी हिंसा की पृष्ठभूमि

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Image caption कराची में पिछले कई सालों से हिंसा जारी है जिसमें सैंकड़ों लोग अपनी गंवा चुके हैं.

पाकिस्तान के कराची शहर ने पिछले दिनों व्यापक स्तर पर हिंसा का सामना किया है जिसमें राजनीतिक दलों के सशस्त्र समूह शामिल हैं.

इसी साल के केवल जुलाई महीने में 300 लोग मारे जा चुके हैं, जिसमें 200 से ज़्यादा लोगों की या तो कथित तौर हत्या की गई या फिर हिंसा का शिकार हुए.

सरकार ने हिंसा को रोकने के लिए अर्धसैनिक बलों को पुलिस के अधिकार दिए गए हैं जिसको कई महीने बीत चुके हैं लेकिन उसमें कोई कमी नहीं देखी जा रही है.

कराची क्यों महत्वपूर्ण?

कराची देश का सबसे बड़ा शहर है जिसकी जनसंख्या करीब एक करोड़ 80 लाख है और जिसमें व्यापक स्तर पर बढ़ोत्तरी भी हो रही है.

कराची पाकिस्तान का आर्थिक केंद्र और दक्षिणी प्रांत सिंध की राजधानी है और कराची बंदरगाह अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अतंरराष्ट्रीय सेना के लिए सामान की आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र भी है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के मुताबिक़ कराची में हिंसा का ख़त्म करना उनकी प्राथमिकता है और कहा कि सरकार कराची की बिगड़ी हुई स्थिति को सह नहीं सकती.

लेकिन बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि ऐसा लगता है कि सरकार हिंसा को रोकने में या तो अनिच्छुक है या असमर्थ और हिंसा ने शहर तो शहर को उजाड़ दिया है.

सुरक्षा अधिकारी इसका कारण यह बताते हैं कि वरिष्ठ राजनेता उन लोगों को संरक्षण दे रहे हैं कि जो कराची में हो रही हिंसा में लिप्त हैं.

'भारी नुक़सान'

स्वतंत्र संस्था पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के मुताबिक़ कराची में इस वर्ष के पहले छह महीनों में 490 लोग मारे जा चुके हैं जबकि वर्ष 2010 में मृतकों की संख्या 748 है.

संवददाताओं के मुताबिक़ अब तो ताज़ा हिंसा का हर कोई शिकार हो रहा है जिसमें राजनैतिक कार्यकर्ता, दुकानदार, बस या टैक्सी का ड्राइवर और आम नागरिक शामिल हैं.

हिंसा के पीछे कौन?

कराची में हिंसा राजनीतिक दलों के बीच सत्ता के लिए हो रहे संघर्ष की वजह से हो रही है और सशस्त्र समूहों का राजनीतिक दलों से संबंध हैं.

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Image caption हिंसा ने कई परिवारों से उनके प्यारे छीने हैं.

यह संघर्ष जातीय आधार पर हो रहा जिसमें निश्चित रुप से तीन राजनीतिक दल शामिल हैं.

पहला मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) जो उर्दूभाषियों का नेतृत्व करत है और यह शहर का एक शक्तिशाली गुट है.

दूसरा अवामी नेशनल पार्टी है जो पठान या पश्तो भाषा बोलने वालों का राजनीतिक गुट है और तीसरा पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी जो केंद्र और प्रांतीय सरकार का नेतृत्व करती है.

पीपुल्स पार्टी पर आरोप है कि वह पठानों का समर्थन कर रही है, जो शहर में मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट के प्रभाव को ख़त्म करना चाहते हैं. पीपुल्स पार्टी इन आरोपों का खंडन करती है.

मुत्ताहिद क़ौमी मूवमेंट सिंध में पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का हिस्सा थी, लेकिन क़रीब एक महीने पहले वह सरकार से अलग हो गई थी.

हिंसा में तालिबान का हाथ?

कराची में हो रही हिंसा में तालिबान के लिप्त होने कोई ठोस सबूत नहीं हैं लेकिन सरकार और कुछ राजनीतिक दल ख़ास तौर पर एमक्यूएम उस पर आरोप लगाते हैं.

अवामी नेशनल पार्टी का कहना है कि तालिबान पर आरोप लगा कर शहर में मौजूद पठानों को ख़त्म करने की कोशिश की जा रही है जो अशांत क़बायली इलाक़ों से विस्थापित हुए हैं.

लेकिन कराची में पिछले सालों में आतंकवादी हमले हुए हैं जिसके लिए तालिबान और अल क़ायदा को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.

'सरकार के उपाय'

केंद्र सराकर ने कराची के हिंसाग्रस्त इलाक़ों को अर्धसैनिक बलों को सौंप दिया है और जिनको अपराधियों के गिरफ्तार करने के अधिकार भी दिए गए हैं.

कुछ राजनीतिक दलों ने कराची में सेना को बुलाने की माँग की है लेकिन गृह मंत्री रहमान मलिक इसका खंडन करते हैं.

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