अमरीकी नागरिक की रिहाई को लेकर भ्रम

  • 25 अगस्त 2011
वारेन वीइनस्टेन
Image caption पाकिस्तान में विदेशियों को अगवा करना अब एक आम बात है.

पाकिस्तान के लाहौर शहर से अगवा किए गए अमरीकी नागरिक की रिहाई पर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. पुलिस के अपने बयान से पलटने के बाद ऐसा हुआ है.

पहले पुलिस ने ये दावा किया था कि उन्होंने 12 दिन पहले अगवा किए गए अमरीकी नागरिक वारेन विंस्टीन को छुड़ा लिया है. लेकिन अब उसने अपना बयान वापस ले लिया है.

लाहौर पुलिस के प्रमुख मलिक अहमद रज़ा का कहना है कि वह विंस्टीन के बंदूकधारियों के चंगुल से छुड़ाए जाने की पुष्टि नहीं कर सकते हैं.

अमरीकी दूतावास का भी कहना है कि अभी तक इस बात के कोई सबूत नहीं मिले है कि उन्हें छुड़ा लिया गया है.

दूतावास की तरफ से ट्विटर पर जारी किए गए संदेश के मुताबिक, "अभी तक हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है, जो ये पुष्ट कर सके कि वारेन विंस्टीन छुड़ा लिए गए हैं. लेकिन हम ये उम्मीद कर रहे हैं कि कुछ सकारात्मक होगा."

वारेन विंस्टीन नाम के इस अमरीकी नागरिक को लाहौर में उनके आवास से अगवा कर लिया गया था.

वारेन पाकिस्तान में पिछले क़रीब पांच साल से रह रहे हैं और उन्हें 15 अगस्त को अमरीका के लिए रवाना होना था.

पाकिस्तान में फिरौती के लिए अपहरण करना एक आम बात है और कुछ विदेशियों को चरमपंथी समूहों ने निशाना भी बनाया है.

अपहरण आम बात

वारेन जेई ऑस्टिन कंपनी के लिए काम करते हैं जो क़बाइली इलाक़ों में विकास का काम करती है और अमरीकी सरकार की सहायता देने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर काम करती है.

इस कंपनी की वेबसाइट पर वारेन के बारे में जानकारी दी गई है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास का काम कराने में विशेषज्ञ हैं और उन्हें 25 सालों का अनुभव है.

अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में उस समय तनाव आ गया था, जब अमरीकी सैन्य अभियान में अल-क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन मारे गए थे.

तो वहीं फरवरी महीने में सीआईए कॉट्रेक्टर रेमंड डेविस ने दो पाकिस्तानी नागरिकों को गोली मार दी थी, जिस पर भी वहां काफी बवाल मचा था.

हालांकि रेमंड ने ये दलील दी थी कि उन्होंने बचाव में गोली चलाई थी क्योंकि ये दो लोग उन्हें लूटने की कोशिश कर रहे थे.

लेकिन मृतक के परिवारवालों को मुआवज़ा दे दिए जाने के बाद रेमंड को छोड़ दिया गया था.

पाकिस्तान में अपहरणकर्ताओं की ओर से विदेशियों को निशाना बनाना एक आम बात हैं. इससे पहले भी एक स्विस दंपति को बलूचिस्तान में अगवा किया गया था.

वर्ष 2010 के मार्च महीने में एक पांच साल के ब्रितानी लड़के को उस समय अगवा कर लिया गया था जब वह पंजाब क्षेत्र में स्थित अपनी दादी के घर उनसे मिलने गया था.

इस बच्चे को 12 दिन तक बंधक बनाया गया और 110,000 पॉउड की फ़िरौती देने पर छोड़ा गया था.

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