वरिष्ठ अल-क़ायदा चरमपंथी मारा गया

अतिया अब्द अल-रहमान
Image caption अधिकारियों के अनुसार अतिया अब्द अल-रहमान पर अल-क़ायदा प्रमुख काफ़ी निर्भर था.

एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने कहा है कि अल-क़ायदा का एक वरिष्ठ कार्यकर्ता अतिया अब्द अल-रहमान पाकिस्तान में मारा गया है. अधिकारी के अनुसार लीबियाई मूल का ये चरमपंथी 22 अगस्त पाकिस्तान के वज़ीरिस्तान इलाक़े में मारा गया है.

इस अधिकारी ने कहा है कि अब्द अल-रहमान की मौत से अल-क़ायदा को बहुत नुकसान होगा क्योंकि गुट के नए नेता आयमन अल-ज़वाहिरी उस पर बहुत निर्भर थे.

अधिकारी ने ये नहीं बताया कि अब्द अल-रहमान को कैसे मारा गया लेकिन 22 अगस्त को वज़ीरिस्तान में एक अमरीकी ड्रोन हमला हुआ था.

बताया जाता है कि अब्द अल-रहमान पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान में सक्रिय पांच बड़े चरमपंथियों में दूसरे नंबर का नेता था, जिसे अमरीका और पाकिस्तान पकड़ना या मारना चाहते थे.

पाकिस्तान अधिकारियों के अनुसार अक्तूबर 2010 में उन्हें लगा था कि ये चरमपंथी एक अमरीकी ड्रोन हमले में मारा गया है लेकिन बाद में ये ख़बर ग़लत निकली.

'कई ज़िम्मेदारियां'

अब्द अल-रहमान ओसामा बिन लादेन का क़रीबी सहयोगी था जिसने मई महीने में पाकिस्तान के उत्तर अमरीकी सैनिकों को मारा था.

अब्द अल-रहमान 1980 के दशक में अफ़गानिस्तान में बिन लादेन से आ मिले थे. बाद में अल-क़ायदा में उसकी साख इस्लाम के विद्वान और विस्फोटकों के माहिर के रूप में बनी थी.

साल 2001 में अफ़गानिस्तान पर अमरीकी हमले के बाद वो बिन लादेन के साथ पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा पर छिप गया था.

अब्द अल-रहमान मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका के चरमपंथी गुटों और अल-क़ायदा के बीच संपर्क सूत्र का भी काम करता था.

अब्द अल-रहमान का ख़त

जून 2006 में अमरीकी सेना के हाथ एक ख़त लगा था जिसे अब्द अल-रहमान ने इराक़ी अल-क़ायदा के चरमपंथी अबु मुसाब अल-ज़रकावी को लिखा था.

इस खत में शियाओं पर हमले करने और प्रतिद्वंद्वी चरमपंथी संगठनों को अलग-थलग करने की सलाह दी गई थी.

इस वर्ष जून में अमरीकी अधिकारियों ने उसे अल-क़ायदा के ऑपरेशन का प्रमुख बताया था.

शनिवार को एक अमरीकी अधिकारी ने पत्रकारों को बताया, “आतिया अब्द अल-रहमान की मौत अल-क़ायदा के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि आयमन अल-ज़वाहिरी उसपर बहुत निर्भर थे, विशेषकर बिन लादेन की मौत के बाद. ”

अधिकारी ने बताया कि बिन लादेन के ख़िलाफ़ ऑपरेशन के दौरान मिले दस्तावेज़ों से साफ़ था कि अब्द अल-रहमान अल-क़ायदा के ऑपरेशनों में बड़ी गहराई से जुड़ा था.

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