पाक में अमरीकी कूटनयिकों की शिकायत

  • 9 सितंबर 2011
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Image caption पाकिस्तान में अब अमरीकी नागरिकों पर नज़र रखी जा रही है.

पाकिस्तान में अमरीकी कूटनयिकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से उनकी गतिविधियों पर अनुचित प्रतिबंध लगा हुआ है.

अमरीकी प्रशासन इस बर्ताव को ‘आधिकारिक उत्पीड़न’ क़रार दे रहा है लेकिन पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि वह सभी कूटनयिकों के लिए सम्मानित और प्रतिष्ठित प्रक्रिया कार्यान्वित कर रही है.

पाकिस्तान में कूटनयिकों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए ऐसे वक़्त में उपाय किए जा रहे हैं जब देश में अमरीका विरोधी भावनाएँ काफ़ी प्रबल हैं.

ऐबटाबाद में अमरीकी सैनिकों की कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन की मौत, क़बायली इलाक़ों में लगातार हो रहे अमरीकी ड्रोन हमले और लाहौर में दो पाकिस्तानी नागरिकों को मारने वाले अमरीकी अधिकारी की रिहाई पाकिस्तान में अमरीका विरोधी भावनाओं में बढ़ोत्तरी के कारण हैं.

अमरीकियों के साथ पक्षपात

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि कुछ ताज़ा घटनाओं से स्पष्ट रुप से यह पता चलता है कि सरकारी स्तर पर कितना पक्षपात है.

क़रीब एक महीने पहले पेशावर में पुलिस ने एक वाहन को रोका जिसमें चार विदेशी नागरिक सवार थे और उन्होंने पुलिस ने बात करने से इंकार कर दिया.

जब स्थानीय पत्रकार वहाँ पहुँचे तो एक दाढ़ी वाले व्यक्ति ने पत्रकारों को एक चिट्ठी दी जिस पर लिखा हुआ था कि “हमें प्रमाण पत्र की ज़रुर नहीं है और हम पेशावर दूतावास से हैं.”

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर कोई कूटनयिक किसी दूसरे शहर की यात्रा करना चाहता है तो दस्तावेज़ों की ज़रुरत होगी और पहले सूचना देनी होगी.

इस्लामाबाद स्थित अमरीकी दूतावास के प्रवक्ता स्योभन ओट जज के मुताबिक़ अमरीकी दूतावास के सभी अधिकारी और कर्मचारी स्थानीय नियमों का पालन करते हैं.

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Image caption पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों से अमरीका विरोधी भावनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है

अमरीकी मीडिया के मुताबिक़ दोनों देश कूटनयिकों की गतिविधियों पर एक समझौते पर सहमत हो गए हैं. पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर का कहना है कि इस मामले पर काम हो रहा है.

ताज़ा हफ़्तों में कुछ ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिससे पता चलता है कि एक शहर से दूसरे शहर जाने केलिए अमरीकी कूटनयिकों को कितनी मुश्किलें हुए हैं.

अमरीकियों पर संख्या पर चिंता

पिछले महीने अमरीकी कूटनयिकों को इस्लामाबाद वापस भेज दिया गया था क्योंकि उनके पास पेशावर में प्रवेश करने का प्रमाण पत्र नहीं था.

अधिकारियों का कहना है कि अमरीकी कूटनयिकों की गतिविधियों पर प्रतिबंध का एक कारण पाकिस्तान में अमरीकी नागरिकों की बढ़ती संख्या है.

2009 में अमरीकी प्रशासन ने पाकिस्तान को साढ़े सात अरब डॉलर अगले पाँच सालों के लिए असैनिक साहयता देने की घोषणा की थी और उसकी वजह से सैंकड़ों अमरीकी पाकिस्तान आए थे.

पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियां अब अमरीकी नागरिकों पर नज़र रख रही है जैसा वह भारतीय कूटनयिकों पर नज़र रखती हैं.

इस समय अमरीका और पाकिस्तान के संबंध तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं.

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