'जेहादी चरमपंथियों को निकाला जाए'

कश्मीर
Image caption पिछले हफ़्ते भी सैंकड़ों लोगों ने जेहादी गुटों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में दर्जनों महिलाओं ने जेहादी गुटों की बढ़ती हुई गतिविधियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया और माँग की कि चरमपंथियों को इलाक़े से निकाला जाए.

यह प्रदर्शन पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के इलाक़े नीलम घाटी में हुआ. एक हफ़्ते के भीतर घाटी में चरमपंथ के ख़िलाफ़ यह दूसरा प्रदर्शन था.

नीलम घाटी जेहादी गुटों की गतिविधियों का मुख्य केंद्र है और स्थानीय लोगों के मुताबिक़ इसी इलाक़े से चरमपंथी घुसपैठ करते हैं.

यह प्रदर्शन ऐसे वक़्त में किया गया है जब नीलम घाटी में नियंत्रण रेखा पर भारत और पाकिस्तान के सैनिकों के बीच गोलीबारी की घटना हुई थी जिसमें चार पाकिस्तानी सैनिकों सहित पाँच लोग मारे गए थे और एक भारतीय सैनिक घायल हो गया था.

स्थानीय लोगों ने बीबीसी को बताया कि नीलम घाटी में चरमपंथियों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियों के ख़िलाफ़ महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया. महिलाओं ने अठमुक़ाम से सालख़ला तक करीब चार किलोमीटर पैदल मार्च किया.

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि हाल के दिनों में नीलम घाटी में चरमपंथियों की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं और वह कथित रुप से सीमा पार कर भारत प्रशासित कश्मीर में प्रवेश कर रहे हैं.

'घुसबैठ के आरोप'

उनका कहना था कि चरमपंथियों की बढ़ती हुई गतिविधियों से उन्हें चिंता है कि नियंत्रण रेखा पर भारत और पाकिस्तान के सेनाओं के बीच पिछले आठ सालों से जारी युद्धविराम ख़तरे में पड़ा सकता है और फिर से गोलीबारी शुरु हो सकती है.

प्रदर्शनकारी माँग कर रहे थे कि नियंत्रण रेखा पर शांति स्थापित की जाए, जेहादी गुटों की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाए और उन्हें घाटी से निकाल दिया जाना चाहिए.

एक प्रदर्शनकारी महिला चांद बीबी ने बीबीसी से बातचीत करते हुए नीलम घाटी की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की.

उन्होंने कहा, “हमें ख़तरा है कि मुजाहेदीन (इस्लामी चरमपंथी) नियंत्रण रेखा के उस पार जाते हैं और वह वहाँ भारतीय सेना को तंग करते हैं और फिर भारतीय सेना हम पर फ़ाइरिंग करती है.”

उनके मुताबिक़ महिलाएँ पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी चिंता से अवगत कराने के लिए वहाँ स्थित सैन्य शिविर तक जाना चाहती थीं लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें बाहर से ही रोक लिया जहाँ सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात की.

'सेना का आश्वासन'

एक महिला, बदल जान ने टेलीफ़ोन पर बीबीसी को बताया, “सैन्य अधिकारियों ने हमें कहा कि आपकी आवाज़ को आगे तक पहुँचा दिया जाएगा और मुजाहेदीन न घुसपैठ करते और न ही आगे करेंगे. साथ ही नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी भी नहीं होगी.”

उन्होंने बताया कि सैन्य अधिकारियों के इस आश्वासन के बाद महिलाओं ने अपना विरोध प्रदर्शन ख़त्म कर दिया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि नियंत्रण रेखा पर 2003 में हुए युद्धविराम के बाद उनका जीवन सामान्य हो गया है लेकिन अब नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी को वह बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं.

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