जेल के अंदर भी चरमपंथी सक्रिय

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Image caption ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना है कि कुछ चरमपंथी जेल के भीतर से आतंकवादी कार्रवाईयों केलिए निर्देश दे रहे हैं.

पाकिस्तान ख़ुफ़िया विभाग का कहना है कि जेलों में क़ैद प्रतिबंधित संगठन के वरिष्ठ नेता जेल के अंदर से ही चरमपंथी कार्रवाई के लिए निर्देश दे रहे हैं.

ख़ुफ़िया विभाग ने उन जेल अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की सिफ़ारिश की है.

ख़ुफ़िया विभाग की रिपोर्ट में जिन जेलों का उल्लेख किया गया है, उनमें पेशावर, रावलपिंडी, बहावलपुर और क्वेटा की जेल शामिल हैं. लेकिन इन्हीं जेलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है.

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि ख़ुफ़िया विभाग की ओर से एक रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें बताया गया है कि पिछले दो महीनों के दौरान देश में जो भी चरमपंथी घटनाएँ हुई हैं, उनके निर्देश जेलों में क़ैद प्रतिबंधित संगठनों के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने दिए थे.

'बड़े हमलों में शामिल'

रिपोर्ट के मुताबिक़ कुछ दिन पहले क़बायली इलाक़े में एक जनाज़े नमाज़ पर हुआ आत्मघाती हमला, पेशावर में बम धमाका और क्वेटा में हुए आत्मघाती हमलों के निर्देश जेलों के अंदर से दिए गए थे.

रिपोर्ट में बताया गया है कि जेलों में क़ैद प्रतिबंधित संगठनों के वरिष्ठ नेता को अलग कमरों में रखा गया, लेकिन वहाँ पर वह स्वतंत्र रुप से अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए हैं.

रावलपिंडी की अड्याला जेल और बहावलपुर की सेंट्रल जेल में प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित क़ैदियों की संख्या बहुत ज़्यादा है.

2008 में मुंबई पर हुए हमलों और 2010 में सेना मुख्यालय पर हुए हमलों के अभियुक्त भी रावलपिंडी की अड्याला जेल में क़ैद हैं.

अधिकारियों का कहना है कि जेलों में क़ैद प्रतिबंधित संगठनों के नेता अपने कामों के लिए जेल अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देते हैं या उन्हें और उनके परिवारों को धमकियाँ देते हैं.

पंजाब और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के जेल विभागों के अधिकारियों ने ख़ुफ़िया एजेंसियों की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट पर कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं है.

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