पाकिस्तान ने दी अमरीका को चेतावनी

  • 23 सितंबर 2011
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Image caption हिना रब्बानी खर से पहले रहमान मलिक ने अमरीका को सबूत देने की चुनौती दी थी

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने अमरीका को चेतावनी दी है कि अगर वह सार्वजानिक रुप से पाकिस्तान पर आरोप लगाता रहेगा तो वह एक साथी खो सकता है.

उन्होंने न्यूयॉर्क में पाकिस्तानी टीवी चैनल जियो न्यूज़ से बातचीत करते हुए कहा, “आप पाकिस्तान को और पाकिस्तानी जनता को अलग-थलग करना गवारा नहीं कर सकते. अगर आपने ऐसा किया तो यह आपकी अपनी ज़िम्मेदारी होगी.”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सार्वजानिक रुप से अपमानित करना कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र की महासभा में पाकिस्तान का नेतृत्व करने पहुँचीं हिना रब्बानी खर ने अमरीका की ओर पाकिस्तान पर लगाए गए सभी आरोपों को रद्द कर दिया है.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने भी अमरीकी अधिकारियों की ओर से पाकिस्तान पर लगाए गए आरोपों की कड़ी आलोचना की है.

उन्होंने कराची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर अमरीका हमारे बिना नहीं रह सकता तो वह हमारे साथ मिल कर ग़लतफ़हमी को दूर करने केलिए संपर्क बढ़ाए.

उन्होंने आगे कहा, “अगर इस तरह का कड़ा संदेश दिया जाएगा तो हमारे लिए अपनी जनता को संभालना मुश्किल हो जाएगा. मैं अमरीका से अनुरोध करता हूँ कि वह हमारे लिए राजनीतिक जहग रखें ताकि हम उनकी अहमियत को जनता तक पहुँचा सकें.”

'आईएसआई पर आरोप'

उल्लेखनीय है कि अमरीका ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाए हैं कि चरमपंथी गुट हक़्क़ानी नेटवर्क से उसके रिश्ते हैं और दो हफ़्ते पहले काबुल पर हुए हमले की जानकारी उसे थी.

अमरीका के शीर्ष सैनिक अधिकारी माइक मलेन ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी इंटर सर्विसेज़ इटेलिजेंस (आईएसआई) पर आरोप लगाया था कि पिछले दिनों काबुल में अमरीकी दूतावास पर हुए हमले में उसने हक़्क़ानी गुट की मदद की है.

एडमिरल मलेन ने अमरीकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में कहा था कि हक़्क़ानी नेटवर्क पाकिस्तान की आईएसआई के पक्के हिस्से के तौर पर काम करता है.

पिछले मंगलवार को काबुल के अमरीकी दूतावास पर हुआ हमला 20 घंटों तक चला था और उसमें 25 लोगों की मौत हो गई थी.

इससे पहले पाकिस्तान के गृहमंत्री ने अमरीका से मांग की थी कि वह चरमपंथी गुट हक़्क़ानी नेटवर्क की क़बायली इलाक़ों में मौजूदगी के सबूत प्रदान करे ताकि दोनों देश मिल कर साझा दुश्मन का मुक़ाबला कर सकें.

हक़्क़ानी नेटवर्क को लेकर पाकिस्तान पर अमरीका की ओर से लगे आरोपों पर उन्होंने बीबीसी से कहा था, “यह आरोप पहले दिन से ही लगाए जा रहे हैं, हम तो आज भी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाइयों में व्यस्त हैं. ख़ैबर एजेंसी और दर्रा आदमख़ेल में आप देख लें.”

गत मई में अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद से अमरीका और पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे हैं.

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