'हक़्क़ानी से संपर्क है लेकिन मदद नहीं'

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Image caption पाक-अमरीका संबंधों में तनाव के बाद पाकिस्तान में अमरीका विरोधी भावनाएँ बढ़ गई हैं.

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि वह चरमपंथी गुट हक़्क़ानी नेटवर्क से संपर्क में है लेकिन वह उसका समर्थन नहीं कर रही है.

अमरीका के शीर्ष सैन्य अधिकारी एडमिरल माइक मलेन ने कुछ दिन पहले कहा था कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई हक़्क़ानी गुट को इस्तेमाल कर छद्म युद्ध लड़ रही है और उसने काबुल हमले में भी हक़्क़ानी नेटवर्क का समर्थन किया था.

पाकिस्तानी सरकार ने अमरीकी अधिकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों का खंडन किया है और विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर यह चेतावनी दे चुकी हैं कि अगर आरोपों का सिलसिला नहीं रुका तो अमरीका आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में एक साथी खो सकता है.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने अमरीकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए गए एक इंटरव्यू में इस बात को माना है कि आईएसआई के हक़्क़ानी नेटवर्क के साथ संपर्क हैं.

उन्होंने कहा, “कोई भी गुप्तचर विभाग किसी सरकार, विरोधी गुट, आतंकवादी संगठन या जो भी कह लीजिए, उसके साथ सकारात्मक परिणामों के लिए संपर्क बनाए रखता है.”

'कई देशों के भी संबंध'

उन्होंने कहा कि अगर कोई पाकिस्तान पर यह आरोप लगाए कि हक़्क़ानी नेटवर्क के साथ संबंध स्थापित करने वाला वह एक मात्र देश है तो यह ग़लत है क्योंकि हक़्क़ानी नेटवर्क से दूसरे देशों का भी संपर्क है.

मेजर जनरल अतहर अब्बास के मुताबिक़ इन संबंधों का यह अर्थ नहीं है कि आईएसआई हक़्क़ानी नेटवर्क की मदद करती है और उसका समर्थन करती है.

उन्होंने कहा कि सेना के पास ख़ुफ़िया जानकारी है कि दूसरे देशों की सरकारों के भी हक़्क़ानी गुट से संपर्क है लेकिन उन्होंने किसी देश का नाम नहीं बताया.

अतहर अब्बास के मुताबिक़ अमरीका ने पाकिस्तान को कोई सबूत नहीं दिए हैं कि आईएसआई हक़्क़ानी नेटवर्क की मदद करता है.

सेना प्रवक्ता ने एडमिरल माइल मलेन के बयान पर नाराज़गी व्यक्त की जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पिछले दिनों काबुल में अमरीकी दूतावास पर हुए हमले में आईएसआई ने हक़्क़ानी नेटवर्क की मदद की थी.

इससे पहले पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने एक बयान में कहा था कि एडमिरल माइक मलेन अच्छी तरह जानते हैं कि कौन-कौन से देशों का हक़्क़ानी नेटवर्क के संपर्क है और केवल पाकिस्तान पर आरोप लगाना उचित नहीं है.

रविवार को सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी की अध्यक्षता में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें ख़ास तौर पर पाकिस्तान और अमरीका के बीच संबंधों में बढ़ते हुए तनाव पर चर्चा की गई.

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