'पाक सरकार ने हज़ारा अल्पसंख्यकों की हत्याओं को नज़रअंदाज़ किया'

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Image caption पाकिस्तान में हज़ारा समुदाय के लोगों ने कई बार हत्याओं के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए हैं

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने पाकिस्तान में सरकारी सुरक्षा एजेंसियों पर अल्पसंख्यक हज़ारा शिया समुदाय के लोगों की हत्याओं को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया है.

बलूचिस्तान प्रांत में बंदूकधारियों ने सितंबर से अब तक कम से कम 45 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी है.

सुन्नी चरमपंथी संगठन लश्करे झांगवी ने इन हमलों को अंजाम देने की ज़िम्मेदारी ली है.

बलूचिस्तान से बीबीसी संवाददाता शोएब हसन का कहना है, "ह्यूमन राइट्स वॉट की रिपोर्ट पाकिस्तान की सरकार की इस हिंसा को नज़रअंदाज़ करने की बहुत तीखी आलोचना है. बयान में कहा गया है कि सरकार सांप्रदायिक और विशिष्ट संस्कृति वाले लोगों के ख़ात्मे के प्रयासों को रोकने में विफल रही है."

लश्करे झांगवी अध्यक्ष रिहा

उनका कहना है कि अल्पसंख्यक हज़ारा समुदाय में भी कुछ इसी तरह की भावना है.

समुदाय के नेताओं ने कहा है कि वे गुस्सा हैं और निराश भी, और वे घिरे हुए और दूसरे दर्जे के नागरिकों की तरह महसूस कर रहे हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच के बयान में कहा गया है कि लश्करे झांगवी जैसे सुन्नी चरमपंथी संगठन बिना रोक-टोक उन इलाक़ों में भी अपनी गतिविधियाँ चला रहे हैं जहाँ क़ानून व्यवस्था और सरकार का नियंत्रण कायम है.

बलूचिस्तान में इन संगठनों को पाकिस्तानी सेना, अर्धसैनिक बलों और गुप्तचर एजेंसियों के सहयोगियों के रूप में देखा जाता है.

पाकिस्तान की सरकार इन आरोपों का खंडन करती है लेकिन कई जाने-माने चरमपंथियों के हाल में रिहा किए जाने से सरकार के दावों की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान है.

हाल में लश्करे झांगवी के अध्यक्ष मलिक इशहाक को रिहा किया गया और उन्होंने रिहा होते ही ज़ोर देकर कहा कि वे इस्लाम के विरोधियों को दंड देने का अपना अच्छा काम जारी रखेंगे.

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