बेनज़ीर हत्या: दो पुलिसकर्मियों, पाँच चरमपंथियों पर आरोप तय

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Image caption बेनज़ीर भुट्टो चुनाव प्रचार कर रही थी जब उनकी हत्या कर दी गई थी

पाकिस्तान में आतंकवाद निरोधक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के मामले में दो पुलिस अधिकारियों और पाँच तालिबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए हैं.

रावलपिंडी के लियाक़त अली पार्क में एक चुनावी रैली के दौरान 27 दिसंबर 2007 को बेनज़ीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी. उस हमले में लगभग 20 अन्य लोग भी मारे गए थे और अनेक घायल हुए थे.

वे उस वक़्त तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रही थीं.

जिन दो पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए गए हैं उनमें से एक उस समय के रावलपिंडी के पुलिस प्रमुख साऊद अज़ीज़ हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने सरकारी वकील के हवाले से कहा है कि इन पुलिस अधिकारियों पर बेनज़ीर भुट्टो की सुरक्षा में दरार और उनकी रक्षा करने में असफल रहने का आरोप लगा है. समाचार एजेंसी ने यह भी लिखा है कि इन पुलिस अधिकारियों को एक साल पहले गिरफ़्तार किया गया था जबकि तालिबान चरमपंथी चार साल से हिरासत में है. पुलिस का कहना है कि इस हत्या के तीन और संदिग्ध पहले ही मारे जा चुके हैं जिनमें पाकिस्तानी तालिबान के प्रमुख बैतुल्लाह महसूद शामिल हैं.

दो संदिग्धों को अभी पकड़ा नहीं जा सका है.

मुशर्रफ़ 'अभियुक्त'

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Image caption भुट्टो दो बाऱ पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनी थी.

इससे पहले फ़रवरी में संघीय जांच एजेंसी ने बेनज़ीर भुट्टो हत्या मामले में दायर अंतरिम चार्जशीट में देश के पूर्व सैनिक शासक परवेज़ मुशर्रफ़ को 'अभियुक्त' बनाया था.

इसके बाद पाकिस्तान की एक अदालत ने बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के मामले में मुशर्रफ की गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया था.

पाकिस्तान के सरकारी वकील ने कहा था कि बेनज़ीर भुट्टो की हत्या एक साज़िश थी और मुशर्रफ़ को उसकी जानकारी थी.

मुशर्रफ़ इन आरोपों को खारिज़ करते रहे हैं.

मुशर्रफ़ के प्रवक्ता ने लंदन से जारी एक बयान में इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि ये वारंट राजनीति से प्रेरित है और वो इसका पालन नहीं करेंगे.

हालांकि परवेज़ मुशर्रफ़ कहते रहे हैं कि अगले चुनाव से पहले वे पाकिस्तान लौटेंगे.

संयुक्त राष्ट्र की जाँच

पाकिस्तान सरकार के अनुरोध पर बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की एक जाँच संयुक्त राष्ट्र ने भी की थी.

संयुक्त राष्ट्र ने जाँच की रिपोर्ट में कहा था कि यदि पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम किए गए होते तो हत्या को रोका जा सकता था.

रिपोर्ट में परवेज़ मुशर्रफ़ की तत्कालीन सैन्य सरकार की कड़ी आलोचना की गई थी और कई कड़ी टिप्पणियाँ की थीं.

संयुक्त राष्ट्र की टीम ने ये भी कहा का कहना था कि अधिकारियों ने क़त्ल की ठीक तरीके से जाँच नहीं की थी.

लेकिन पाकिस्तान सरकार ने इस रिपोर्ट के कई अंशों पर आपत्ति की थी उनमें पाकिस्तान की सेना और तालिबान के बीच सांठगांठ के संकेत देने वाले अंश भी शामिल थे.

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