चरमपंथियों के निशाने पर सरकारी स्कूल

Image caption इन स्कूलों में ज़्यादातर यानी 75 प्रतिशत स्कूल लड़कियों के हैं.

पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में पिछले कई सालों से सरकारी स्कूल चरमपंथियों के निशाने पर हैं लेकिन कुछ समय से इन हमलों का दायरा ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के शहरी इलाक़ों की ओर भी तेज़ी से बढ़ रहा है.

पिछले कई दिनों से इस प्रकार की घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है और विशेषकर शहरी इलाक़ों में जहाँ सरकार का नियंत्रण पूरी तरह से स्थापित है, वहाँ इस प्रकार की घटनाओं ने लोगों को निश्चित रुप से चिंतित कर दिया है.

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के 24 ज़िलों में बहुत कम ऐसे इलाक़े होंगे जहाँ चरमपंथियों ने स्कूलों को निशाना न बनाया हो.

पिछले सप्ताह नौशहरा और स्वाबी के ज़िलों में एक ही रात में दो सरकारी स्कूल चरमपंथियों के हमले में नष्ट हो गए और यह दोनों घटनाएँ शरही इलाक़ों में घटीं. इसे पहले प्रांत के मुख्य शहर पेशावर के बाहरी इलाक़ों में भी सरकार स्कूलों को बम धमाकों से उड़ा दिया गया था.

प्रांतीय शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी इफ़्तिख़ार अहमद ने बीबीसी को बताया कि ज़िला पेशावर में पिछले दो सालों के दौरान 40 के करीब स्कूल चमरपंथियों के हमलों का निशाना बने हैं.

उन्होंने कहा कि उन स्कूलों में ज़्यादातर यानी 75 प्रतिशत स्कूल लड़कियों के हैं जबकि दूसरे लड़कों के हैं और उनमें से तीन स्कूलों का पूनर्निर्माण किया गया है और बाक़ी ख़राब स्थिति में मौजूद हैं.

500 स्कूल बने निशाना

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह सरकार का दावा है कि प्रांत के अधिकतर ज़िलों में सरकार का नियंत्रण है लेकिन उसके बावजूद भी स्कूलों पर हमलों में कमी नहीं हो सकी है.

पेशावर में ऐसे इलाक़ों में भी स्कूल निशाना बने हैं जो शहर के केंद्र में स्थित हैं लेकिन सरकार अभियुक्तों को गिरफ़्तार करने में विफल रही है.

स्वात घाटी प्रांत में ऐसा इलाक़ा है जहाँ सबसे पहले स्कूलों पर हमलों की शुरुआत हुई और फ़िर एक ऐसा वक़्त भी आया कि यह अपने चरम तक पहुँचे.

स्वात घाटी और आस पास के ज़िले बुनैर, शांगला, अपर दीर और लोअर दीर में सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ अब तक करीब 500 स्कूल चरमपंथियों की कार्रवाई में निशाना बने हैं.

उसके साथ ही स्वात घाटी में तालिबान के वरिष्ठ नेता मौलाना फ़ज़लुल्लाह ने लड़कियों के स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

स्वात घाटी से तालिबान विद्रोहियों के चले जाने के बाद पिछले दो सालों से वहाँ स्कूलों पर हमले की कोई घटना नहीं घटी है. लेकिन क़बायली इलाक़ों के स्कूल लगातार चरमपंथियों के हमलों के निशाना बन रहे हैं.

पहले क़बायली इलाक़ों में जब स्कूलों पर हमले होते थे तो सरकार यह कहती थी वहाँ उसका नियंत्रण नहीं है लेकिन अब सराकर भी दावा करती है कि क़बायली इलाक़ों में उसका नियंत्रण स्थापित हो चुका है, फिर भी स्कूलों पर हमले रुक नहीं सके हैं.

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