पाक-अमरीका संबंधों में फिर हुआ तनाव

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Image caption पाकिस्तानी सरकार ने अमरीका और नेटो के साथ कूटनीतिक और सैन्य सहयोग की नीति पर पुनर्विचार के संकेत दिए हैं.

नेटो सेना की ओर से 26 नवंबर को पाकिस्तानी चौकी पर किए गए हमले ने अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में एक बार फिर तनाव पैदा कर दिया है.

जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सेना के लिए पाकिस्तान के रास्ते सामान की आपूर्ति पर रोक लगा दी है और शम्सी एयरबेस को ख़ाली करने के लिए अमरीका को 15 दिनों का समय दिया है.

पाकिस्तान ने अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सेना के साथ कूटनीतिक, राजनीतिक और सैन्य स्तर पर सहयोग की नीति पर पुनर्विचार के संकेत दिए हैं.

अमरीका के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच संबंधों को बचाने के लिए काफ़ी कोशिशें की है और उनके मुताबिक़ यह प्रयास दक्षिण एशिया विशेषकर अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं.

अमरीका के विदेश और रक्षा मंत्रियों ने एक साझा बयान में इन हमलों पर पाकिस्तानी नेतृत्व के प्रति संवेदना प्रकट की है.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, रक्षा मंत्री लियोन पनेटा और अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेना के प्रमुख जनरल जॉन ऐलन ने शनिवार देर रात अपने पाकिस्तानी समकक्षों को टेलीफ़ोन किए और संवेदना प्रकट की.

पाकिस्तान की ओर इन टेलीफ़ोन कॉल्स और साझा बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

'पाकिस्तान मुश्किल में'

रक्षा मामलों के वरिष्ठ जानकार डॉ. हसन असकरी कहते हैं कि दोनों देशों को एक दूसरे की ज़रुरत है और वह ताज़ा संकट को सुलझाने की कोशिशें करेंगे लेकिन इस प्रकार के हमलों से पाकिस्तान को सहयोग देना और मुश्किल बना देता है.

उन्होंने बताया है कि देश में बड़ती अमरीका विरोध भावनाओं के बीच अमरीका से संबंध बेहतर बनाने के लिए सेना, सत्ताधारी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, आवामी नेशनल पार्टी और मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट मिल कर काम कर सकते हैं.

उनका कहना है, “जब पाकिस्तानी सेना के ख़िलाफ़ हमला होता है तो उसकी विश्वसनीयता कमज़ोर पड़ जाती है और अमरीका के साथ अपने सहयोग का बचाव करना मुश्किल हो जाता है.”

उनके मुताबिक़ अगले साल अफ़ग़ानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के जाने पहले उसके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पाकिस्तान और अमरीका को एक दूसरे की ज़रुरत है.

यह इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों देश ताज़ा संकट को किस तरह सुलझाते हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो के लिए खाद्य और अन्य सामग्री की आपूर्ति पर आनिश्चित काल के लिए रोक लगाने का फ़ैसला एक कड़ा क़दम ज़रुर है लेकिन अभूतपूर्व नहीं है.

सितंबर 2010 में जब नेटो सेना के हेलीकॉप्टरों से कुर्रम एजेंसी में दो पाकिस्तानी सैनिकों मार दिया था तो उस समय भी नेटो सेना को 11 दिनों तक सामान की आपूर्ति नहीं हो सकी थी.

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Image caption नेटो सेना के हमले के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन किया गया.

अमरीका की ओर से उस हमले पर माफ़ मांगने के बाद सामान की आपूर्ति शुरु हो गई थी.

अधिकारियों का कहना है कि नेटो सेना को 40 प्रतिशत के ज़्यादा खाद्य सामग्री और तेल की आपूर्ति पाकिस्तान के रास्ते से होती है.

'बातचीत का विकल्प'

पाकिस्तान में हो रही रुकावटों से बचने के लिए अमरीकी प्रशासन मध्य एशिया के रास्ते अफ़ग़ानिस्तान में नेटो सेना के लिए सामान की आपूर्ति के एक विकल्प पर विचार कर रही है.

यह विकल्प अमरीका के लिए बहुत जटिल और मंहगा सिद्ध हो सकता है क्योंकि कई देशों से हो कर यह सामान अफ़ग़ानिस्तान पहुँचेगा लेकिन इस पर काम हो सकता है.

पाकिस्तानी यह जानते हैं और हक़ीक़त यह है कि स्थायी रुप से इस रास्ते के बंद हो अफ़ग़ान मामलों को लेकर पाकिस्तानी फ़ायदा को नुक़सान ज़रुर पहुँचेगा लेकिन उससे ज़्यादा नेटो सेना की सामरिक क्षमता को नुक़सान पहुँचेगा.

इसलिए पाकिस्तानी मंत्रिमंडल की रक्षा समिति ने अपनी आपात बैठक में इस रास्ते को स्थायी रुप से बंद करने के बजाए उस पर कुछ दिनों के लिए रोक लगा दी है.

इससे लगता है कि पाकिस्तानी प्रशासन ने बातचीत के विकल्प को सामने रखा है.

जहाँ तक बलूचिस्तान स्थित शम्सी एयरबेस ख़ाली करवाने का पाकिस्तानी सरकार का फ़ैसला कोई नया नहीं है.

पाकिस्तान ने मार्च में भी अमरीका प्रशासन से कहा था कि वह शम्सी एयरबेस ख़ाली करदे जब अमरीकी नागरिक ने लाहौर में पाकिस्तानी शहरियों की हत्या कर दी थी.

'शम्सी एयरबेस'

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Image caption सरकार ने हमलों के बाद नेटो को खाद्य और अन्य सामग्री की आपूर्ति पर रोक लगा दी है.

उस वक़्त अमरीकी अधिकारियों ने कहा था कि उसने अपने सैनिकों को एयरबेस से हटा दिया है और केवल तेकनीकी अधिकारी मौजूद हैं.

पाकिस्तानी सरकार ने शम्सी एयरबेस संयुक्त अरब इमारात को पट्टे पर दिया है और 2001 में अमरीका पर हुए हमलों के बाद उसे अमरीका सेना को इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी.

अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्या पाकिस्तानी सरकार ने अमरीका सेना को एयरबेस से निकालने के लिए संयुक्त अरब इमारात के संपर्क किया है और क्या ऐसा करने जा रही है?

अधिकतर जानकार मानते हैं कि सरकार ने यह घोषणा केवल जनता की भावनाओं को कम करने के लिए की है और न कि क्षेत्र में पश्चमी देशों की सेनों की क्षमता को नुक़सान पहुँचाने के लिए.

पाकिस्तान ने अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सेना के साथ कूटनीतिक, राजनीतिक और सैन्य स्तर पर सहयोग की नीति पर पुनर्विचार के लिए कह तो दिए हैं लेकिन इस पर अमल करने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं.

पाकिस्तान के पास अफ़ग़ानिस्तान की समस्या के समाधान के लिए बातचीत की प्रक्रिया में अमरीका के साथ सहयोग ख़त्म करने का विकल्प है और अमरीका के पास पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य साहयता पर रोक लगाने के विकल्प मौजूद है.

पाकिस्तानी सेना अमरीका साहयता पर भी निर्भर करती है.

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