पाकिस्तान का बैठक के बहिष्कार का फ़ैसला

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Image caption पाकिस्तान में उस घटना के विरोध में बड़े प्रदर्शन हुए हैं

पाकिस्तान ने नेटो के हवाई हमले में अपने 24 सैनिकों की मौत के बाद अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य पर चर्चा के लिए होने वाली बैठक के बहिष्कार का फ़ैसला किया है.

जर्मनी के बॉन शहर में अगले सप्ताह ये बैठक प्रस्तावित है और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद इसमें शामिल नहीं होने का फ़ैसला हुआ.

पाकिस्तान का कहना है कि हवाई हमलों से उसकी संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है और ये अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेना के अधिकार क्षेत्र से भी बाहर है.

अमरीका और नेटो ने उस घटना पर माफ़ी माँगते हुए उस घटनाक्रम को दर्दनाक बताया है.

नेटो अब उस घटना की जाँच कर रहा है. जवाब में पाकिस्तान ने उसकी सीमा से होकर अफ़ग़ानिस्तान जाने वाली नेटो की आपूर्ति पर रोक भी लगा दी है.

पाकिस्तान में उस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है जहाँ जनता के बढ़ते दबाव और अमरीका से सभी रिश्ते तोड़ लेने की विपक्षी दलों की माँग के बीच ये कैबिनेट बैठक हुई.

'जवाबी कार्रवाई'

एक सरकारी अधिकारी ने लाहौर में कैबिनेट की बैठक के बाद बताया, "पाकिस्तान ने विरोध स्वरूप बॉन सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने का फ़ैसला किया है."

पाकिस्तानी सेना ने उन ख़बरों से इनकार किया है जिनके तहत कहा गया था कि उनकी सीमा से हुई गोलीबारी के चलते नेटो ने जवाबी हमला किया.

अफ़ग़ान अधिकारियों ने कहा था कि नेटो फ़ौजों ने पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी का जवाब दिया था. उस घटना के बाद से पहले ही तनावग्रस्त नेटो और पाकिस्तान के रिश्तों में और खटास आई है.

पिछले कुछ महीनों में अमरीकी सेना ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई पर आरोप लगाए थे कि वह अफ़ग़ानिस्तान में नेटो सैनिकों के विरुद्ध चरमपंथियों की मदद कर रहे हैं.

इसके अलावा जिस तरह अमरीकी सेना ने ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तानी ज़मीन पर कार्रवाई करके मारा था उसके बाद से भी संबंधों में काफ़ी तनाव है.

पाकिस्तानी सेना का कहना है कि हेलिकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों ने दो सीमा चौकियों को निशाना बनाया जिसमें 24 लोग मारे गए.

कुछ अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले से वॉल स्ट्रीट जर्नल में कहा गया था कि शनिवार के हवाई हमले नेटो और अफ़ग़ान फ़ौजों पर हुई गोलाबारी के बचाव में किए गए थे.

मगर पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने इन आरोपों के जवाब में कहा, "ये सच नहीं है. वे अब बहाने बना रहे हैं. उनका क्या नुक़सान हुआ है, कितने हताहत हैं?"

सैनिक सूत्रों ने बीबीसी को बताया था कि अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान के विशेष सैनिकों का एक दल उस इलाक़े में गया था जहाँ तालेबान का एक प्रशिक्षण शिविर होने की आशंका थी.

सूत्रों के अनुसार उस दल पर पाकिस्तान की सीमा से पर हमला हुआ जिसके बाद उन्हें नेटो के मुख्यालय से जवाबी कार्रवाई की इजाज़त मिली.