अमरीका ख़ाली करे शम्सी हवाई अड्डा: पाकिस्तान

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Image caption पाकिस्तान में उन हमलों का व्यापक विरोध हुआ है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अमरीका से शम्सी हवाई अड्डा 11 दिसंबर तक ख़ाली करने को कहा है.

इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य को लेकर जर्मनी के बॉन शहर में हो रहे सम्मेलन में हिस्सा लेने की अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई की अपील भी उन्होंने ख़ारिज कर दी है.

पाकिस्तान ने अब कहा है कि वह तब तक बॉन सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा जब तक उसकी सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाती. इसे एक तरह से पाकिस्तान के सम्मेलन में हिस्सा लेने की शर्त के तौर पर भी देखा जा रहा है.

कराची में प्रधानमंत्री गिलानी ने बताया कि जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ ने अमरीकी अधिकारियों कि चिट्ठी लिखकर बता दिया है कि उन्हें शम्सी हवाई अड्डा 11 दिसंबर तक ख़ाली करना है.

अमरीका उसी अड्डे से ड्रोन हमले करता रहा है.

वहीं बॉन सम्मेलन में हिस्सा लेने को लेकर गिलानी ने बताया कि अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने मंगलवार रात उन्हें फ़ोन करके पाँच दिसंबर को होने वाली बैठक में शामिल होने की अपील की थी.

गिलानी ने कहा, "अफ़ग़ान ज़मीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के ख़िलाफ़ किया गया है और हम इसका विरोध करते हैं. हम नहीं चाहते कि हमारे भाई मुल्क़ की ज़मीन, जो कि हमारे जुड़वाँ की तरह हैं, पाकिस्तान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो. इसलिए विरोध के तौर पर हम वहाँ जाना नहीं चाहते."

भरोसा

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के मुताबिक़, "अफ़ग़ानिस्तान ने हमें बताया कि हमला उनकी ओर से नहीं हुआ था बल्कि नेटो ने किया था, अमरीका ने किया था. तो हमने उनसे कहा कि अमरीका से हमारे बॉन जाने के बारे में बात करिए. क्योंकि हमें अपने देश की सुरक्षा करनी है. तो जब तक हमारी सुरक्षा, संप्रभुता, सम्मान और पाकिस्तानी आत्मसम्मान की रक्षा का भरोसा नहीं दिलाया जाता हम इस तरह नहीं जा सकते."

पाकिस्तानी सेना ने नेटो के हमले पर एक बार फिर से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह हमला बिना किसी उकसावे के हुआ जो नेटो की निरंकुश आक्रामकता को दर्शाता है.

वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अशफ़ाक़ नदीम ने रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि नेटो सेना के हमले से सहयोग प्रणाली का उल्लंघन हुआ है.

उन्होंने बताया कि पाक-अफ़ग़ान सीमा पर पाकिस्तानी सेना की चौकियों की पूरी जानकारी नेटो सेना को दी गई थी और नक़्शे के माध्यम से भी समझाया गया था.

पाकिस्तानी सेना का कहना है कि नेटो सेना के हेलिकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों ने दो सीमा चौकियों को निशाना बनाया था जिनमें 24 लोग मारे गए थे.

इस बीच अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य पर जर्मनी में होने वाली बैठक से अलग होने के पाकिस्तान के फ़ैसले के बाद अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका दोनों ने ही उससे इस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है.

'घुसपैठ नहीं'

वहीं मेजर जनरल अशफ़ाक़ नदीम ने कहा कि जिस इलाक़े में नेटो विमानों ने हमला किया, पाकिस्तानी सेना ने पहले ही उसको चमरपंथियों से सुरक्षित कर लिया था और वहाँ से चरमपंथियों की कोई घुसपैठ नहीं हो रही थी.

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Image caption पाकिस्तान ने कहा है कि वह विरोधस्वरूप अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य पर होने वाले सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा

उन्होंने बताया कि इससे पहले नेटो सेना ने 2008, 2009 और 2011 में हमले किए थे जिनमें 14 सैनिक मारे गए थे और 13 के क़रीब घायल हो गए थे. उस समय जाँच की घोषणा की गई थी लेकिन जाँच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है.

उन्होंने हमले की जानकारी देते हुए कहा कि 26 नवंबर की रात दो से तीन हेलिकॉप्टरों ने पाकिस्तानी चौकियों पर हमला कर दिया जिनमें 24 सैनिक मारे गए और 15 अन्य घायल हो गए.

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में बनी समिति ने अफ़ग़ानिस्तान में नेटो के लिए खाद्य और अन्य सामग्री ले जाने वाला रास्ता बंद कर दिया था.

पुनर्विचार की अपील

मंत्रिमंडल की रक्षा मामलों की समिति की बैठक के बाद पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि वो अमरीका, नेटो और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ सभी कार्यक्रमों पर जारी सहयोग पर दोबारा विचार करेगी जिसमें कूटनीतिक, राजनीतिक और सैन्य सहयोग शामिल है.

समिति ने ये भी कहा था कि अमरीका को शम्सी हवाई अड्डा 15 दिन में ख़ाली करना होगा. अमरीका यहाँ से ड्रोन हमले करता है.

दूसरी ओर पाकिस्तान ने नेटो के हवाई हमले में अपने सैनिकों की मौत के बाद मंगलवार को घोषणा की कि वह अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य पर चर्चा के लिए जर्मनी के बॉन शहर में होने वाली बैठक का बहिष्कार करेगा.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान से कहा है कि वह बॉन सम्मेलन में भाग न लेने के अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करे जबकि अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भी अपने पाकिस्तानी समकक्ष से पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है.

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